मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का साक्षात्कारभोपाल , दिसंबर 14 -- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने दो वर्ष के कार्यकाल को उपलब्धियों से भरा बताते हुए कहा है कि प्रदेश से नक्सल समस्या को समाप्त करना उनकी सरकार की सबसे बड़ी सफलता है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के कारण विकास बाधित होता है और आम नागरिक भय में रहता है, ऐसे में इसे जड़ से खत्म करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही, जिसमें उल्लेखनीय सफलता मिली है।

यूनिवार्ता को दिए विशेष साक्षात्कार में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच हुए पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक नदी परियोजना (पीकेसी-ईआरसीपी) समझौते को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच पिछले 20-25 वर्षों से जल बंटवारे को लेकर मुकदमे चल रहे थे, जिन्हें आपसी सहमति और संवाद से समाप्त किया गया। पानी के न्यायोचित बंटवारे से दोनों राज्यों के किसानों को लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने विकास कार्यों के लिए कभी बजट की कमी आड़े नहीं आने दी। केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के माध्यम से सिंचाई विस्तार और पेयजल संकट के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। इस परियोजना के लिए भारत सरकार से कई पुरस्कार मिलना प्रदेश के लिए गौरव की बात है।

व्यक्तिगत जीवन से जुड़े प्रश्न पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उनके परिवार और घर के संस्कारों ने उन्हें सादगी का मार्ग सिखाया है। इसी कारण मुख्यमंत्री रहते हुए अपने पिता के निधन पर किसी प्रकार का दिखावा नहीं किया और न ही अपने पुत्र के विवाह में ढोल-ढमाका किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए सादगी और संयम ही उनकी पहचान है।

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के लिए लैंड पुलिंग को लेकर हो रहे विरोध के सवाल पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार कभी किसान विरोधी नहीं रही है। उन्होंने कहा कि सभी को विश्वास में लेकर कार्य किया जाएगा। साधु-संतों के लिए स्थायी निर्माण होंगे, केवल कार्य करने का तरीका बदलेगा ताकि किसी के हित प्रभावित न हों।

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