नयी दिल्ली , जनवरी 16 -- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कहा कि प्रस्तावित नए बीज कानून में घटिया बीज बेचने के दोषियों पर 30 लाख का जुर्माना और तीन साल तक की जेल की सजा का भी प्रावधान है।
उन्होंने यहां संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि नया 'बीज अधिनियम 2026' भारतीय कृषि क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सुधार का कदम है। उन्होंने कहा कि यह कानून नकली बीजों की समस्या को जड़ से खत्म करने, गुणवत्ता सुनिश्चित करने और बाजार में पारदर्शिता लाने के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसानों की सुरक्षा, बीज की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाला ऐतिहासिक कदम है।
श्री चौहान ने बताया कि अब देश में बीजों के लिए 'ट्रेसिबिलिटी' या पूरी जानकारी वाली व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके तहत एक क्यूआर कोड भी होगा, जिसे स्कैन करते ही किसान को पता चल जाएगा कि बीज कहां उत्पादित हुआ, किस डीलर ने दिया और उसे किसने बेचा। इस सिस्टम से घटिया या नकली बीज की पहचान तुरंत हो जाएगी और दोषियों पर त्वरित कार्रवाई संभव होगी। उन्होंने कहा, "खराब बीज आएंगे ही नहीं, और अगर आएंगे तो पकड़े जाएंगे। जिसने खराब बीज दिया, उसे दंड दिया जाएगा।" इससे किसानों को भ्रमित करने वाली कंपनियों और डीलरों की मनमानी पर लगाम लगेगी।"श्री चौहान ने कहा कि बीजों की गुणवत्ता में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं होगी। साल 1966 के पुराने कानून में जुर्माना मात्र 500 रुपये था, जिसे अब बढ़ाकर 30 लाख रुपये तक करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही, जानबूझकर किसानों को धोखा देने वालों के लिए तीन साल तक की जेल की सजा का भी प्रावधान किया गया है। नए कानून के तहत अब हर बीज कंपनी के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा। इससे बाजार में केवल अधिकृत कंपनियां ही बीज बेच पाएंगी और फर्जी या अनधिकृत विक्रेताओं के लिए कोई जगह नहीं होगी।
श्री चौहान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसान अपने परंपरागत बीज बोने, आपस में बदलने या सवा गुना वापस करने की पारंपरिक प्रणाली को जारी रखने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। इस पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। उन्होंने उदाहरण दिया कि ग्रामीण इलाकों में बोनी के समय किसान आपस में बीज लेते-देते हैं और बाद में उसे सवा गुना वापिस कर देते हैं, यह पारंपरिक प्रणाली आगे भी जारी रहेगी। नए बीज कानून में आईसीएआर, कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों जैसे सार्वजनिक संस्थानों के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाले बीज बनाने वाली देसी कंपनियों को भी मजबूत बनाया जाएगा। विदेशी बीजों के लिए एक सख्त मूल्यांकन व्यवस्था होगी, ताकि जांच के बाद ही उन्हें बाजार में उतारा जा सके।
कृषि को राज्य का विषय बताते हुए श्री चौहान ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकारों के अधिकार यथावत रहेंगे। केंद्र केवल समन्वय का कार्य करेगा और राज्यों के सहयोग से ही इस कानून को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।
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