लखनऊ , नवम्बर 19 -- उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कुछ मीडिया संस्थानों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि ये राजनीतिक स्वार्थ में डूबे ''दानाजीवी मीडिया हाउस'' हमारे महाकाव्यों की सांकेतिक कथाओं को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत कर रहे हैं। साथ ही उनके मानने वालों की धार्मिक भावनाओं को आहत कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि परिवारवाद पर लगातार चलाया जा रहा यह एजेंडा दरअसल भारतीय महागाथाओं के मूल तत्व परिवार, एकजुटता और त्याग का अपमान है।
श्री यादव ने बुधवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते हुए कहा कि भाजपा और उसके समर्थक परिवार को नकारात्मक रूप में पेश करके समाज की एकता को कमजोर करना चाहते हैं। उनका आरोप है कि ''जो लोग सत्ता-भक्ति में लीन हैं, वे ''परिवार'' शब्द का मज़ाक उड़ाकर प्रत्यक्ष रूप से हमारे महाकाव्यों के प्रतीकात्मक अर्थों को बदनाम कर रहे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि परिवार समाज की नींव है, और परिवारों की एकजुटता ही समाज को मजबूत बनाती है।''उन्होंने कहा कि भाजपा और उसके ''अपरिवारवादी'' समर्थक चाहते हैं कि लोग परिवारों से अलग-थलग पड़ जाएँ ताकि उन्हें भय और भ्रम के सहारे नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि ''ये लोग भुखमरी, बेरोज़गारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और किसानों-मज़दूरों की समस्या जैसे असल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए परिवारवाद का झूठा नैरेटिव फैलाते हैं।''पूर्व मुख्यमंत्री ने चुनौती दी कि यदि भाजपा परिवार को इतना खराब मानती है तो उसे अपने संगठन से उन सभी नेताओं को हटाना चाहिए जिनके परिवार के सदस्य कभी राजनीति में रहे हैं, उन्हें चंदा देना बंद करना चाहिए जिनके व्यवसाय परिवार आधारित हैं और नाम के साथ आने वाले पारिवारिक सरनेम का उपयोग भी रोक देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि ''क्या भाजपा यह घोषणा करेगी कि अधिकारी का बेटा अधिकारी नहीं बनेगा, डॉक्टर का बेटा डॉक्टर नहीं बनेगा या मीडिया मालिक का बेटा मीडिया हाउस नहीं चलाएगा।''उन्होंने मीडिया हाउसों पर भी हमला बोलते हुए कहा कि कई संस्था चाहती हैं कि परिवार टूटें ताकि उपभोक्तावाद बढ़े और कंपनियों के विज्ञापनों से उनकी कमाई में इजाफ़ा हो। ''ये बताएं कि विज्ञापनों और दानापोषी से कमाए अरबों रुपये में से कितना अपने कर्मचारियों को दिया।''इस दौरान श्री यादव ने दिवंगत व्यक्तियों के प्रति सम्मान बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि पत्रकारिता की मर्यादा यही है कि गुजरे हुए लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार हो। ''सम्मान नहीं कर सकते तो अपमान भी न करें।''उन्होंने कहा कि अब पीडीए (पिछड़े-दलित-अल्पसंख्यक) अपमान सहन नहीं करेगा और हर परिवार की खुशहाली और समाज में भाईचारे की रक्षा के लिए खुलकर आवाज़ उठाएगा।
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