देहरादून , जनवरी 22 -- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास में डीआरएम मुरादाबाद विनीता श्रीवास्तव ने शिष्टाचार भेंट की। इस मौके पर राज्य में रेल अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण, पूर्ण एवं प्रगतिरत रेल परियोजनाओं तथा भविष्य की आवश्यकताओं को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
मुलाकात के दौरान डीआरएम, मुरादाबाद ने मुख्यमंत्री धामी को बताया कि उत्तराखंड राज्य में कई महत्वपूर्ण रेल परियोजनाएँ सफलतापूर्वक पूर्ण की जा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि रुड़की से देवबंद को जोड़ने वाली नई 27.45 किलोमीटर की रेलवे लाइन परियोजना का कमीशनिंग कर दिया गया है, जिसके अंतर्गत बनहेड़ा खास एवं झबरेड़ा में नए रेलवे स्टेशनों का निर्माण किया गया है।
इसके अतिरिक्त राज्य के प्रमुख रेल मार्गों पर गति वृद्धि से संबंधित कार्य भी पूर्ण किए गए हैं, इसमें लक्सर-हरिद्वार रेल खंड को 110 किलोमीटर प्रति घंटा तक उन्नत किया गया है जबकि सहारनपुर-हरिद्वार खंड को 110 किलोमीटर प्रति घंटा करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 130 किलोमीटर प्रति घंटा गति लक्ष्य हेतु डीपीआर स्वीकृत की जा चुकी है तथा दीर्घकालिक रूप से 160 किलोमीटर प्रति घंटा गति के लिए मार्गों की पहचान की गई है।
उत्तराखंड खंड में लक्सर, लंढौरा-धनौरा, रुड़की, चोड़ीआला एवं ऐथल समेत कई स्थानों पर आरओबी, आरयूबी एवं एलएचएस से संबंधित कार्य पूर्ण किए गए हैं, जिससे रेलवे क्रॉसिंग पर सुरक्षा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और व्यस्त स्थानों पर यातायात जाम की समस्या में कमी आई है।
विनीता श्रीवास्तव ने उन्हें यह भी बताया कि राज्य में कई महत्वपूर्ण रेल परियोजनाएं वर्तमान में प्रगति पर हैं। हर्रावाला, रुड़की व कोटद्वार रेलवे स्टेशनों पर अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत पुनर्विकास कार्य किया जा रहा है। जिसमें नए स्टेशन भवनों का निर्माण, एसी प्रतीक्षालय, फूड कोर्ट, दिव्यांगजन एवं पैदल यात्रियों के अनुकूल डिज़ाइन, प्लेटफार्म ऊंचाई का मानकीकरण, प्लेटफार्म शेड, नए एवं चौड़े फुट ओवर ब्रिज तथा आधुनिक सर्कुलेटिंग एवं पार्किंग क्षेत्र का विकास शामिल है।
इसके अलावा योग नगरी ऋषिकेश से कर्णप्रयाग को जोड़ने वाली नई रेलवे लाइन परियोजना निर्माणाधीन है, जिसकी कुल लंबाई 125.20 किलोमीटर है। इस परियोजना में मार्ग में 12 स्टेशन, 35 पुल एवं 17 सुरंगें शामिल हैं तथा प्रमुख सुरंगों का कार्य लगभग 94 प्रतिशत तक पूर्ण किया जा चुका है।
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