रायपुर, नवंबर 16 -- छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में धान खरीदी का सीजन 15 नवंबर से शुरू हो चुका है, लेकिन पहले ही दिन भारी अव्यवस्था सामने आई। पार्टी ने आरोप लगाया है कि प्रदेश के 2748 उपार्जन केंद्रों में से 2560 केंद्रों में धान खरीदी हुई ही नहीं, जिससे सरकार की तैयारियों की पूरी पोल खुल गई है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने रविवार को बयान जारी कर कहा कि सरकार सिर्फ घोषणा कर रही है लेकिन जमीन पर कोई व्यवस्था नहीं है। सोसायटी कर्मचारी हड़ताल पर हैं एवं कम्प्यूटर ऑपरेटर हड़ताल पर हैं जिससे टोकन जारी नहीं हो पा रहे। लगभग 15 हजार सोसायटी कर्मचारी हड़ताल पर हैं, लेकिन सरकार वार्ता कर समाधान निकालने के बजाय उन पर एस्मा लगाकर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने धान खरीदी की तारीख 15 दिन देर से घोषित की और जब खरीदी शुरू हुई तो अधिकांश केंद्रों में खरीदी न होना यह दिखाता है कि सरकार के पास 3100 रुपये प्रति क्विंटल में धान खरीदने के लिए पैसा ही नहीं है। इसलिए लगातार ऐसे बहाने ढूंढे जा रहे हैं ताकि धान खरीदी कम से कम हो।
श्री शुक्ला ने आगे कहा कि पहले दिन किसान पूरे दिन बारदाना, तौल-कांटा, टोकन और व्यवस्था का इंतजार करते रहे, लेकिन कोई खरीदी न होने से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। न ऐप से टोकन जारी हो रहा है और न ही कहीं ऑफलाइन सुविधा उपलब्ध है। उपार्जन केंद्रों की स्थिति सरकार के दावों के ठीक विपरीत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस सरकार ने पिछले खरीफ सीजन में सोसायटी कर्मचारियों को मांगें पूरा करने का लिखित आश्वासन दिया था, पर आज तक वादे पूरे नहीं हुए। उल्टा रायपुर जिले में कर्मचारियों पर एस्मा लगाकर उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही है। धान परिवहन और मिलिंग की प्रक्रिया को लेकर भी अब तक पूरी अनिश्चितता बनी हुई है।
कांग्रेस ने कहा हेै कि सरकार की नाकामी का सीधा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी नदारद हैं और सरकार समस्या सुलझाने के बजाय दमन का रास्ता अपना रही है।
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