धमतरी , दिसंबर 08 -- छत्तीसगढ के धमतरी शहर में रेल लाइन निर्माण कार्य तेजी से जारी है लेकिन इस विकास की कीमत स्टेशनपारा के वे परिवार चुका रहे हैं, जो दशकों से यहाँ बसे हुए थे। अवैध कब्जे की श्रेणी में आने के कारण इन परिवारों को विस्थापित किया गया लेकिन अब वे कड़कड़ाती ठंड में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। इनमें कई बुजुर्ग, महिलाएँ और छोटे बच्चे शामिल हैं, जिनमें से कुछ भीख मांगकर या दिहाड़ी मजदूरी कर अपना गुज़ारा करते हैं।
पुरानी मंडी क्षेत्र की स्थितियाँ बेहद दयनीय हैं। दिसंबर की ठिठुरती रातों में जहाँ लोग घरों में दुबके रहते हैं, वहीं ये बेघर परिवार तिरपाल और प्लास्टिक के सहारे अस्थायी ठिकाने बनाकर जीवन यापन कर रहे हैं। कई बच्चों के पास गर्म कपड़े तक नहीं हैं, और वे कचरे से आग जलाकर शरीर गर्म करने को मजबूर हैं।
शहर में रेल सेवा जनवरी से शुरू होने की उम्मीद है, जिससे जहां यात्रियों और स्थानीय लोगों को राहत व रोजगार मिलने की संभावना बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर बेघर हुए गरीब परिवारों की सुध लेने वाला कोई नहीं दिख रहा। जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की अनुपस्थिति से इन परिवारों में निराशा बढ़ती जा रही है।
इसी बीच मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने कहा है कि नगर निगम की टीम को मौके पर भेजकर बेघर परिवारों के लिए तत्काल राहत और उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
धमतरी के विकास के साथ-साथ जरूरतमंदों की सुरक्षा और पुनर्वास पर भी ध्यान देना अब अनिवार्य हो गया है, वरना विकास की रफ्तार के बीच कई परिवार बेघरपन की ठंड में ही ठिठुरते रह जाएंगे।
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