चेन्नई , फरवरी 17 -- तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले द्रमुक के साथ सत्ता साझेदारी की मांग को लेकर उठे स्वर के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि यह कुछ नेताओं की व्यक्तिगत राय है, न कि कांग्रेस या एआईसीसी का आधिकारिक रुख।
श्री वेणुगोपाल ने कहा कि द्रमुक कांग्रेस की पुरानी और विश्वसनीय सहयोगी है। उन्होंने परोक्ष रूप से भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों दल "फासीवादी और सांप्रदायिक ताकतों" को हराने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिससे यह संकेत मिला कि चुनाव से पहले गठबंधन बरकरार रहेगा।" उन्होंने पार्टी नेताओं को हिदायत दी कि गठबंधन और सत्ता साझेदारी पर सार्वजनिक टिप्पणी से बचें, क्योंकि यह पार्टी हाईकमान की आधिकारिक लाइन नहीं है।
जिला सचिवों की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में श्री वेणुगोपाल ने कहा कि लोकसभा सांसद मणिकम टैगोर और श्री प्रवीण चक्रवर्ती सहित कुछ नेताओं द्वारा सत्ता साझेदारी की बात उनके निजी विचार हैं। उन्होंने दोहराया कि गठबंधन और सीट बंटवारे जैसे मामलों पर अंतिम निर्णय एआईसीसी द्रमुक नेतृत्व से बातचीत के बाद ही लेगी।
सूत्रों के अनुसार, सत्ता साझेदारी की मांग से द्रमुक नेतृत्व असहज था और उसने सीट बंटवारे की वार्ता से पहले संबंधित नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की शर्त रखी थी। बताया जाता है कि द्रमुक ने कांग्रेस नेतृत्व को संकेत दिया था कि जब तक इस मुद्दे पर अनुशासनात्मक कदम नहीं उठाए जाते, तब तक सीट बंटवारे की औपचारिक बातचीत नहीं होगी।
इस बीच, एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री मणिकम टैगोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "नो फियर. नो फियर (अचमिल्लई. अचमिल्लई)", जिससे संकेत मिला कि वे अपने रुख पर कायम हैं।
द्रमुक पहले ही घोषणा कर चुकी है कि 22 फरवरी से, विधानसभा के बजट सत्र (जो 20 फरवरी को समाप्त होगा) के बाद सीट बंटवारे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। एआईसीसी द्वारा गठित सीट बंटवारा समिति को मुख्यमंत्री एवं द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन से मिले 75 दिन से अधिक हो चुके हैं। श्री वेणुगोपाल के स्पष्टीकरण के बाद अब गठबंधन में आई तल्खी कम होने और सीट बंटवारे की वार्ता जल्द शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
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