नयी दिल्ली , नवंबर 07 -- संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष एनालेना बैरबॉक ने दोहा शिखर सम्मेलन के समापन प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह शिखर सम्मेलन कमियों की पहचान करने से लेकर सिद्ध समाधानों पर अमल करने की दिशा में एक "सुविचारित बदलाव" का प्रतीक है।
उन्होंने कहा, "कोपेनहेगन ने हमें 30 साल पहले सिखाया था कि मज़बूत समाजों के लिए सामाजिक विकास और समावेशन ज़रूरी हैं। हमने किसी को पीछे न छोड़ने का वादा किया था। सामाजिक विकास कोई दान जैसा कार्य नहीं है और नहीं प्रत्येक द्वारा अपने हिंत में किये जाने वाला कार्य है। यह हर देश के हित में है।"उन्होंने चेतावनी दी कि आज भूख और गरीबी अभाव के कारण नहीं, बल्कि संघर्ष, असमानता और राजनीतिक विफलताओं के कारण हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "सबसे बड़ी समस्याओं में से एक पैसा नहीं है। बल्कि यह है कि इसे कैसे निवेश किया जाता है।"शिखर सम्मेलन में 40 से ज़्यादा राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों, 230 से ज़्यादा मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों और लगभग 14,000 उपस्थित लोगों ने भाग लिया।
औपचारिक पूर्ण सत्र और गोलमेज चर्चाओं के साथ-साथ, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार करने, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा तक पहुंच में सुधार लाने और सम्मानजनक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान करने हेतु 250 से अधिक "समाधान सत्र" आयोजित किए गये।
उप महासचिव अमीना मोहम्मद ने कहा कि यह परिणाम नागरिक समाज, ट्रेड यूनियनों, सामुदायिक नेताओं, व्यवसायों और युवा प्रतिनिधियों द्वारा पूरे सप्ताह व्यक्त की गई तात्कालिकता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, "संदेश स्पष्ट है, लोग हमसे केवल घोषणाओं की नहीं, बल्कि उत्तरों की अपेक्षा करते हैं।" "दोहा राजनीतिक घोषणापत्र कोई पुराना दस्तावेज़ नहीं है। यह लोगों को सतत विकास के केंद्र में रखने की प्रतिबद्धता है।"उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अब कार्यान्वयन का ध्यान गरीबी में कमी लाने, वास्तविक रोज़गार सृजित करने और यह सुनिश्चित करने पर होना चाहिए कि कोई भी पीछे न छूटे। "हमने दोहा में दरवाज़ा खोल दिया है। अब हमें मिलकर इसमें आगे बढ़ना होगा।"कतर की राजदूत अलया अहमद सैफ अल-थानी ने कहा कि शिखर सम्मेलन की मेजबानी उनके देश के इस विश्वास को दर्शाती है कि समानता, सम्मान और समावेशिता शांति और समृद्धि के लिए आवश्यक हैं।
उन्होंने कतर के घरेलू सामाजिक खर्च और विदेशों में अंतर्राष्ट्रीय विकास साझेदारियों का उल्लेख करते हुए कहा, "लोगों में निवेश एक राष्ट्र द्वारा किया जा सकने वाला सबसे स्थायी निवेश है।"उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अब प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि प्रतिबद्धताएं पृष्ठ से हटकर नीतिगत रूप में सामने आएं।
उन्होंने कहा, "इस शिखर सम्मेलन के परिणाम एक मज़बूत आधार प्रदान करते हैं। अब सबसे महत्वपूर्ण बात कार्यान्वयन है।"संयुक्त राष्ट्र के क्षेत्रीय निकाय अनुवर्ती कार्रवाई का समर्थन करेंगे। क्षेत्रीय आर्थिक आयोगों ने कहा कि वे प्रतिबद्धताओं को व्यावहारिक उपायों में बदलने में देशों की सहायता करेंगे।
यूरोप के आर्थिक आयोग ने वृद्धावस्था नीतियों, किफायती आवास, न्यायसंगत ऊर्जा परिवर्तन और बेहतर गरीबी आंकड़ों के लिए समर्थन पर ज़ोर दिया, जिससे सरकारों को सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों तक पहुंचने वाली प्रणालियां डिज़ाइन करने में मदद मिली।
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