देहरादून , नवम्बर 13 -- उत्तराखंड पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) की साइबर क्राइम पुलिस टीम ने देश में प्रचलित डिजिटल अरेस्ट स्कैम के जरिये करीब 87 लाख रुपये ठगी का भंडाफोड़ करते हुये मुख्य अभियुक्त को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया है। इन साइबर ठगों द्वारा डिजिटल हाउस अरेस्ट कर बसंत विहार, देहरादून और कालाढूंगी, नैनीताल निवासी पीड़ितों से कुल 87 लाख की धनराशि ठगी किये जाने के मामले का पर्दाफाश हुआ है।

एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नवनीत सिंह भुल्लर ने गुरुवार को बताया कि देहरादून निवासी पीड़ित ने सितम्बर में मामला दर्ज कराया। इसी दौरान कालाढूंगी (नैनीताल), में भी इसी तरह की शिकायत मिली। जिसमें पीड़ितों ने शिकायत की कि अगस्त-सितम्बर में अज्ञात व्यक्तियों द्वारा स्वयं को महाराष्ट्र साइबर क्राइम विभाग/केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से बताते हुए पीड़ित की आईडी पर मोबाइल सिम लेने और उसका गलत प्रयोग के नाम पर एवं मनी लांड्रिंग के तहत करोड़ों रुपये के लेनदेन होने की बात कही गयी थी। जिसके लिये पीड़ित के सभी बैंक खातों/जमीन जायजाद का वैरिफिकेशन करने हेतु व्हाटसप वीडियो कॉल पर ही पीडित को "डिजिटली अरेस्ट" करते हुए विभिन्न खातों में कुल 87 लाख रुपये की धनराशि ऑनलाइन जमा करवायी गयी।

श्री भुल्लर ने बताया कि गिरोह द्वारा ग्रेटर मुम्बई पुलिस ऑफिसर एवं सीबीआई अधिकारी बन व्हाट्सअप पर वीडियो कॉल/वॉइस कॉल के माध्यम से पीडित को लगभग 48 घण्टे तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्त द्वारा धोखाधडी में प्रयुक्त किये जा रहे बैंक खाते के विरुद्ध देश भर के विभिन्न राज्यों की कुल 24 शिकायतें पायी गयी तथा उक्त खाते में नौ करोड़ से अधिक धनराशि का संदिग्ध लेन देन पाया गया है। उन्होंने बताया कि इस मामले में तमाम साक्ष्यों के आधार पर किरण कुमार केएस (31) पुत्र सिद्दप्पा क्यारत्ते, निवासी फ्लैट नंबर टी 14, चौथी मंजिल, डी ब्लॉक, पैरामीड वॉट सोनिया अपार्टमेंट, जाकरू नेहरू नगर येलाहांका ओल्ड टाउन, बेंगलुरु (उत्तरी) को गिरफ्तार कर देहरादून लाया गया है। जबकि उसकी सहयोगी राजेश्वरी रानी (40) पत्नी मुत्थु स्वामी निवासी मल्लेशपल्या, बेंगलुरु, हाल पता तमिलनाडु को भारतीय न्याय संहिता की धारा 35(3) के तहत नोटिस दिया गया है।

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