जालंधर , नवंबर 03 -- राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम के सलाहकार डाॅ नरेश पुरोहित ने पैंक्रियाटिक कैंसर जागरूकता माह पर जनजागृति के लिए सोमवार को कहा कि देश में अग्नाशय कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं और यह भारत के उत्तरी एवं पूर्वी प्रदेशों में ज्यादा देखा जा रहा है।
निवारक ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. पुरोहित ने सोमवार को यहां बताया कि भारत में हर एक लाख की आबादी में लगभग दो से 2.5 लोग अग्नाशय के कैंसर से पीडित हैं। वर्तमान में देश में पुरुषों में अग्नाशय कैंसर के मामले 0.5-2.4 प्रति लाख और महिलाओं में 0.2-1.8 प्रति लाख हैं। कैंसर एक खामोश बीमारी है। कई लोगों को इसके कोई लक्षण नहीं होते हैं, जब तक कि यह बहुत बढ़ न जाये। जिन लोगों में इसका निदान होता है, उनमें से केवल सात प्रतिशत ही पांच साल या उससे अधिक समय तक जीवित रह पाते हैं।
उल्लेखनीय है कि इस खतरनाक कैंसर ने एलन रिकमैन, स्टीव जॉब्स और एरीथा फ्रैंकलिन जैसी मशहूर हस्तियों की जान ले ली।
डॉ पुरोहित ने बताया कि अग्नाशय कैंसर से पीड़ित ज्यादातर रोगियों को तेज दर्द, वजन कम होना और पीलिया जैसी बीमारियां होती हैं। मधुमेह के मरीजों में अग्नाशय के कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अधिक आयु (60 से ऊपर) के पुरुष, धूम्रपान, खाने में सब्जियों और फल की कमी, मोटापा, आनुवांशिकता भी कई बार अग्नाशय कैंसर की वजह होते हैं। उन्होंने आगाह किया कि इस कैंसर से बचने के लिए इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी होता है, ताकि समय रहते इसका इलाज कराया जा सके। इस कैंसर के शुरुआती लक्षण पीठ और पेट में दर्द होना है। ये आम समस्या हो सकती है, लेकिन लंबे समय तक दर्द बना रहे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पेट और पीठ में दर्द के अलावा पीलिया, वजन घटना, पाचन समस्याएं, थकान, भूख कम लगना जैसे लक्षण भी शामिल हैं। मशहूर चिकित्सक ने बताया कि अग्नाशय कैंसर से बचाव के लिए नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण और स्क्रीनिंग कराना एवं धूम्रपान और अल्कोहल से परहेज करने की आवश्यकता है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित