नयी दिल्ली , मार्च 13 -- केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने शुक्रवार को कहा कि देश में हैंडलूम की वस्तुओं का आयात न के बराबर है और सरकार हथकरघा क्षेत्र के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

राज्य सभा में प्रश्नकाल के दौरान समाजवादी पार्टी के जावेद अली खान के अनुपूरक सवाल का जवाब देते हुए श्री सिंह ने कहा कि सरकार कुछ हथकरघा वस्तु को बाजार में " प्रतिष्ठित उत्पाद की श्रेणी' में स्थान दिलाने की योजना पर काम कर रही है।

कानून के तहत हथकरघा क्षेत्र के उत्पादों को संरक्षण के बाजूद देश में वियतनाम , चीन और अन्य देशों से हथकरघा वस्तुओं के कथित आयात और उसकी मानिटरिंग की व्यवस्था के बारे में श्री खान के अनुपूरक प्रश्नों के उत्तर में मंत्री ने कहा कि ''जहां तक हथकरघा उत्पादों के आयात का सवाल है तो यह न के बराबर है।"हथकरघा उत्पादों को प्रतिष्ठा दिलाने के बारे में उन्होंने कहा कि लोग हथकरघा के माल की तुलना मिल के माल से करते हैं। हम हथकरघा उत्पादों को नीश ' प्रतिष्ठित उत्पाद' की श्रेणी में भी लाना चाहते हैं। उन्हें कोई अधिक विवरण दिए बिना कहा कि छह बुनकर सहायता केंद्रों के माध्यम से ऐसा करने की योजना है। उन्होंने कहा कि बुनकारों की हर प्रकार की मदद के लिए देश भर में क्लस्टर के आधार पर 29 बुनकर केंद्र बनाए गये हैं। इनमें से छह को इस काम में लगाया जाएगा।

श्री सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने 2015 में 7 अक्टूबर को हथकरघा दिवस घाेषित किया। यह 'सबका साथ, सबका विकास' के मोदी सरकार लक्ष्य की दिशा में बड़ा संदेश है। उन्होंने कहा कि इस सरकार ने पहली बार हथकरघा इकाइयों की गणना करायी है और इस क्षेत्र में सातों दिन चौबीसो घंटे निगाह रखी जाती है।

उन्होंने बताया कि गणना के अनुसार इस समय देश में कुल 28.20 लाख हथकरघे काम कर रहे हैं जिसमें छोटी बड़ी हर तरह की इकाइयों द्वारा चलाए जा रहे करघे हैं। इन करघों पर 35.22 लाख लोग रोजगार और स्व-रोजगार में लगे हैं। इनमें 70 प्रतिशत महिलाएं हैं तथा इस क्षेत्र में महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं। इस क्षेत्र में काम पर लगे लोगों में 10 लाख लोग अनुसूचित जाति और जन जाति के हैं।

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