जयपुर , अप्रैल 07 -- केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि कृषि और किसान को बढ़ावा देने के लिए अब पूरे देश को विभिन्न एग्रो-क्लाइमेटिक जोनों में बांटकर हर राज्य के लिए अलग कृषि रोडमैप बनाया जाएगा और नकली खाद पर प्रभावी रोकथाम के लिए सख्त एवं नया कानून लाकर दोषियों को कठोर सजा देने की दिशा में कदम उठाए जायेंगे।
श्री चौहान ने मंगलवार को यहां पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में भाग लेने के अवसर पर पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में चर्चा की कि हर राज्य की जलवायु, कृषि, पानी की उपलब्धता अलग अलग हैं और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर हर राज्य का एक अलग कृषि रोड मैप बनाया जायेगा। इसके लिए केन्द्र सरकार के अधिकारी, वैज्ञानिक, राज्य सरकारों के कृषि मंत्री और उनकी पूरी टीम एवं कृषि विशेषज्ञ काम करेंगे और हर राज्य का अलग कृषि रोड मैप बनायेंगे।
उन्होंने कहा कि सभी किसानों को फार्मर आईडी से जोड़कर खाद, बीज, फसल बीमा और मुआवजा वितरण की पूरी प्रणाली को पारदर्शी और लक्षित किया जाएगा। राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के तहत 2024-25 में 429.89 लाख टन के रिकॉर्ड उत्पादन और उत्पादकता में हुई बढ़ोतरी को और आगे बढ़ाते हुए तिलहन का क्षेत्र 29 मिलियन हेक्टेयर से 33 मिलियन हेक्टेयर और उत्पादन 39.2 मिलियन टन से 69.7 मिलियन टन तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है जबकि दलहन मिशन के तहत बीज उत्पादन, दाल मिलों की स्थापना, नई बीज किस्मों को सीड चेन में लाने तथा इच्छुक किसानों से 100 प्रतिशत खरीद के माध्यम से देश को दालों में भी मजबूत आत्मनिर्भरता की ओर ले जाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि यह देश की पहली रीजनल कॉन्फ्रेंस है जिसमें आईसीएआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, प्रगतिशील किसान, एफपीओ, नेफेड, एनसीसीएफ और बीज से लेकर बाजार तक काम करने वाली सभी संस्थाएं एक मंच पर आई हैं जबकि पहले खरीफ और रबी के लिए केवल राष्ट्रीय स्तर पर एक कॉन्फ्रेंस होती थी जिसमें समयाभाव से विस्तार से चर्चा नहीं हो पाती थी। उन्होंने कहा कि अब देश को पांच एग्रो-क्लाइमेटिक जोनों में बांटकर पांच रीजनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जायेगी जिनमें हर राज्य की जलवायु, मिट्टी, पानी और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर अलग कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा और उसी के अनुसार यह तय होगा कि किस इलाके में कौन-सी फसल, कौन-सी किस्म और कौन-सी कृषि पद्धति सर्वोत्तम होगी।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सभी राज्यों में फार्मर आईडी बनाने का काम तेज गति से चल रहा है और विश्वास जताया कि लगभग तीन महीने में सभी किसानों की एकीकृत पहचान तैयार हो जाएगी जिससे किसान को हर योजना का लाभ सीधे और सटीक रूप से मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में फार्मर आईडी के आधार पर खाद वितरण का जो मॉडल लागू है, उसी तर्ज पर पूरे देश में व्यवस्था की जाएगी जिसमें किसान को लाइन में नहीं लगना पड़ेगा, उसकी जमीन और फसल के अनुसार आवश्यक मात्रा में खाद मिलेगा, नकली या ब्लैक मार्केटिंग रोकी जा सकेगी और बटाईदार किसानों को भी मालिक की स्वीकृति के आधार पर फार्मर आईडी से खाद व अन्य सुविधाएं मिलेंगी। यही आईडी आगे फसल बीमा, फसल-क्षति मुआवजा और अन्य लाभों का भी आधार बनेगी।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के अंतर्गत 2024-25 में तिलहन का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर 429.89 लाख टन तक पहुँच गया है, जो 2023-24 में 396.69 लाख टन था। उन्होंने कहा कि उत्पादकता 2023-24 के 1314 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में 1412 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है जो किसानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और यह संदेश देती है कि सही नीति, बीज, तकनीक और प्रोत्साहन से देश तिलहन में आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।
श्री चौहान ने बताया कि 2025-26 में 1076 वैल्यू चेन क्लस्टरों के माध्यम से 13.35 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को तिलहन के अंतर्गत लाया गया है, 60 बीज केंद्र स्थापित किए गए हैं, 50 बीज भंडारण इकाइयों को मंजूरी दी गई है और 400 तेल मिलें स्थापित हो चुकी हैं जबकि कुल 800 तेल मिलें स्थापित करने का लक्ष्य है ताकि उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग और बाजार तक पूरी श्रृंखला मजबूत हो।
उन्होंने कहा कि तिलहन में आत्मनिर्भरता के लिए 10,103 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है ताकि किसानों को तकनीक, बीज, सिंचाई, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में पूरा सहयोग मिल सके। उन्होंने बताया कि लक्ष्य यह है कि तिलहन का क्षेत्र 29 मिलियन हेक्टेयर से बढ़ाकर 33 मिलियन हेक्टेयर किया जाए, उत्पादकता 1353 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 2112 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की जाए और कुल उत्पादन 39.2 मिलियन टन से बढ़ाकर 69.7 मिलियन टन तक ले जाया जाए ताकि खाद्य तेलों में आयात पर निर्भरता में निर्णायक कमी लाई जा सके और किसानों को उच्च मूल्य वाली फसलों से अधिक आय मिले।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित