नयी दिल्ली , जनवरी 29 -- संसद में गुरुवार को पेश आर्थिक सर्वेक्षण में देश में लोगों में बढ़ते मोटापे पर चिंता व्यक्त करते हुये इसे स्वास्थ्य संबंधी एक प्रमुख चुनौती बताया गया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किये गये सर्वेक्षण में कहा गया है कि देश में मोटापा चिंताजनक तेजी से बढ़ रहा है। इसके अनुसार स्वास्थ्य के लिए हानिकारक आहार, भागदौड़ भरी जिंदगी सहित जीवन-शैली में बदलाव, 'अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड' का अत्यधिक सेवन सभी आयुवर्ग के लोगों को प्रभावित कर रहा है और इससे मधुमेह, हृदयरोग और हाइपरटेंशन जैसे गैर-संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ रहा है।

सर्वेक्षण में कहा गया है कि वर्ष 2019-21 के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के अनुसार 24 प्रतिशत भारतीय महिलाएं और 23 प्रतिशत भारतीय पुरुष मोटापे के शिकार हैं। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि अधिक वजन की समस्या के शिकार पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की संख्या 2015-16 में 2.1 प्रतिशत से बढ़कर 2019-21 में 3.4 प्रतिशत हो गयी।

सर्वेक्षण में मोटापे को एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती रूप में पहचानते हुए कहा गया है कि सरकार ने इस समस्या के निदान के लिए कई पहल शुरू की हैं ताकि स्वास्थ्य, पोषण, शारीरिक गतिविधि, खाद्य सुरक्षा और जीवनशैली में सुधार को एकीकृत करते हुए समग्र दृष्टिकोण अपनाया जा सके। पोषण अभियान एवं पोषण 2.0, फिट इंडिया मूवमेंट, खेलो इंडिया, ईट राइट इंडिया, जैसे राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान, इन पहलों के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इसके अलावा, एफएसएसएआई ने 'मोटापा रोकें, मोटापा भगाएं - मोटापा रोकने हेतु जागरूकता पहल' अभियान शुरू किया है।

सर्वेक्षण के अनुसार अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड लंबे समय से स्थापित आहार पैटर्न को विस्थापित कर रहे हैं जिससे आहार की गुणवत्ता में गिरावट आ रही है तथा ये अनेक दीर्घकालिक रोगों के बढ़े हुए जोखिम से जुड़े हुए हैं। सर्वेक्षण में आहार संबंधी सुधारों को सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्राथमिकता बताया गया है।

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