रांची , मार्च 11 -- झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता और महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने देश में पेट्रोलियम और एलपीजी की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।

श्री भट्टाचार्य ने आज कहा कि देश में ऊर्जा संकट की स्थिति बन रही है और सरकार वास्तविक हालात को छिपाकर लोगों को गुमराह कर रही है।

श्री भट्टाचार्य ने पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में पत्रकारों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम मंत्री और अन्य केंद्रीय मंत्री संसद के माध्यम से देश को गलत जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार यह दावा करती है कि एलपीजी का कोई संकट नहीं है, वहीं दूसरी ओर घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाए जा रहे हैं।

श्री भट्टाचार्य ने कहा कि घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के बीच अब 25 दिनों का अंतर रखा गया है। उन्होंने चिंता जताई कि यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब रमजान का महीना चल रहा है और कई जगहों पर शादी और त्योहारों का सीजन भी है।

श्री भट्टाचार्य ने इस संकट के लिए केंद्र सरकार की विदेश नीति को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने पारंपरिक मित्र देशों के साथ संबंध कमजोर कर लिए हैं। उनके अनुसार पहले जिन देशों से भारत को सस्ता तेल मिलता था, आज उनसे संबंध पहले जैसे नहीं रह गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति और भी कठिन हो सकती है।

श्री भट्टाचार्य ने कहा कि इस संकट का असर आम लोगों के जीवन पर भी दिखाई दे रहा है। कई शहरों में होटल और रेस्टोरेंट गैस की कमी के कारण प्रभावित हो रहे हैं। रांची में भी बाहर से पढ़ाई करने आए छात्रों के लिए चलने वाली कई मेस और टिफिन सेवाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

प्रधानमंत्री के एक पुराने बयान का जिक्र करते हुए सुप्रियो भट्टाचार्य ने व्यंग्य करते हुए कहा कि कभी नाली गैस का उदाहरण दिया गया था, लेकिन आज देश को वास्तविक ऊर्जा समाधान की जरूरत है। उन्होंने कहा कि केवल प्रतीकात्मक उपायों से समस्या का समाधान नहीं होगा।

श्री भट्टाचार्य ने कहा कि एलपीजी, सीएनजी और पेट्रोलियम से जुड़ी व्यवस्था पूरी तरह केंद्र सरकार और उसके उपक्रमों के अधीन है, इसलिए इस संकट के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अंत में उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार इस स्थिति का जल्द समाधान निकाले ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।

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