..पुण्यतिथि 11 दिसंबर के अवसर पर ..मुंबई, 11 दिसंबर (वार्ता) भारतीय सिनेमा जगत में कवि प्रदीप को ऐसे गीतकार के तौर पर याद किया जाता है, जिन्होंने देश प्रेम की भावना से ओत प्रोत गीत लिखकर लोगों के दिलों में विशिष्ठ पहचान बनायी।
मध्यप्रदेश के छोटे से शहर में मध्यम वर्गीय बाह्मण परिवार में छह फरवरी 1915 को जन्में प्रदीप को बचपन के दिनों से ही हिन्दी कविता लिखने का शौक था जिसे वह कवि सम्मेलनों में पढ़कर सुनाया करते थे। वर्ष 1939 में लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक तक की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने शिक्षक बनने का प्रयास किया लेकिन इसी दौरान उन्हें मुंबई मे हो रहे एक कवि सम्मेलन में हिस्सा लेने का न्योता मिला।कवि सम्मेलन में उनके गीतों को सुनकर बाम्बे टॉकीज स्टूडियो के मालिक हिंमाशु राय काफी प्रभावित हुये और उन्होंने प्रदीप को अपने बैनर तले बन रही फिल्म 'कंगन' के गीत लिखने की पेशकश की। वर्ष 1939 में प्रदर्शित फिल्म कंगन में उनके गीतों की कामयाबी के बाद प्रदीप बतौर गीतकार फिल्मी दुनिया मेंअपनी पहचान बनाने मे सफल हो गये। इस फिल्म के लिये लिखे गये चार गीतों मे से प्रदीप ने तीन गीतों को अपना स्वर भी दिया था।
वर्ष 1940 मे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम अपने चरम पर था। देश को स्वतंत्र कराने के लिय छिड़ी मुहिम में कवि प्रदीप भी शामिल हो गये और इसके लिये उन्होनें अपनी कविताओं का सहारा लिया। अपनी कविताओं के माध्यम से प्रदीप देशवासियों मे जागृति पैदा किया करते थे।वर्ष 1940 में ज्ञान मुखर्जी के निर्देशन मे उन्होंने फिल्म 'बंधन' के लिये भी गीत लिखा। यूं तो फिल्म बंधन मे उनके रचित सभी गीत लोकप्रिय हुये लेकिन ..चल चल रे नौजवान .. के बोल वाले गीत ने आजादी के दीवानो में एक नया जोश भरने का काम किया। अपने गीतों को प्रदीप ने गुलामी के खिलाफ आवाज बुलंद करने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया और उनके गीतों ने अंग्रेजो के विरूद्व भारतीयो के संघर्ष को एक नयी दिशा दी। इसके बाद प्रदीप ने बाम्बे टॉकीज की ही फिल्म नया संसार, अंजान, पुर्नमिलन, झूला और किस्मत के लिये भी गीत लिखे।
चालीस के दशक में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अंग्रेजी सरकार के विरूद्ध भारत छोड़ो आंदोलन अपने चरम पर था। वर्ष 1943 मे प्रदर्शित फिल्म 'किस्मत' में प्रदीप के लिखे गीत ..आज हिमालय की चोटी से फिर हमने ललकारा है .दूर हटो ए दुनियां वालो हिंदुस्तान हमारा है ..जैसे गीतों ने जहां एक ओर स्वतंत्रता सेनानियो को झकझोरा वहीं अंग्रेजो की तिरछी नजर के भी वह शिकार हुये। प्रदीप का रचित यह गीत ..दूर हटो ए दुनिया वालों ..एक तरह से अंग्रेजी सरकार के पर सीधा प्रहार था। कवि प्रदीप के क्रांतिकारी विचार को देखकर अंग्रेजी सरकार द्वारा गिरफ्तारी का वारंट भी निकाला गया। गिरफ्तारी से बचने के लिये कवि प्रदीप को कुछ दिनों के लिये भूमिगत रहना पड़ा।यह गीत इस कदर लोकप्रिय हुआ कि सिनेमा हॉल में दर्शकों की ओर से इसे बार-बार सुनने की ख्वाहिश होने लगी और फिल्म की समाप्ति पर दर्शको की मांग पर इस गीत को सिनेमा हॉल मे दुबारा सुनाया जाने लगा। इसके साथ ही फिल्म 'किस्मत' ने बॉक्स आफिस के सारे रिकार्ड तोड़ दिये और इस फिल्म ने कोलकाता के एक सिनेमा हॉल मे लगातार लगभग चार वर्ष तक चलने का रिकार्ड बनाया।
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