श्रीगंगानगर , दिसम्बर 19 -- राजस्थान में श्रीगंगानगर में देश की पहली और अनोखी गाजर मंडी के निर्माण कार्य को शुक्रवार को गाजर उत्पादक किसान समिति के पदाधिकारियों और किसानों ने रुकवा दिया।
इस गाजर मंडी का मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा दो सप्ताह पूर्व शिलान्यास किया गया था। यह मंडी कृषि विपणन बोर्ड द्वारा बनाई जा रही है और किसानों का कहना है कि इसका वर्तमान नक्शा उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप नहीं है, जिससे भविष्य में गाजर उत्पादकों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
गाजर उत्पादक किसान समिति के संरक्षक और गंगनहर परियोजना के पूर्व अध्यक्ष गुरबलपालसिंह संधू, जिलाध्यक्ष अमरसिंह बिश्नोई, प्रवक्ता सुभाष सहगल एडवोकेट, किसान आर्मी के संयोजक एवं पूर्व पार्षद मनिंदरसिंह मान सहित अन्य पदाधिकारी और बड़ी संख्या में किसान आज निर्माण स्थल पर पहुंचे और कार्य को रोक दिया। इसके बाद वे जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने जिला कलेक्टर डॉ. मंजू को संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में किसानों ने मंडी की बनावट में संशोधन की मांग की, ताकि यह गाजर उत्पादकों की आवश्यकताओं को पूरा कर सके।
संयुक्त किसान मोर्चा के अनुसार इस वर्ष श्रीगंगानगर जिले में किसानों ने करीब 10 हजार हेक्टेयर भूमि में गाजर की बुवाई की है। गांव साधुवाली में गंगनहर की मुख्य शाखा पर गाजर की धुलाई, पैकेजिंग और परिवहन के लिए किसानों और मजदूरों ने करीब 300 मशीनें लगा रखी हैं। पिछले 20 वर्षों से इस क्षेत्र के किसान गाजर मंडी की मांग कर रहे थे। यहां की गाजर की गुणवत्ता पूरे देश में प्रसिद्ध है। राज्य सरकार ने इस मांग को मानते हुए इस वर्ष मंडी निर्माण की घोषणा की थी। आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पांच दिसम्बर को भव्य कार्यक्रम में इसका शिलान्यास किया। इस परियोजना पर करोड़ों रुपये की लागत आने का अनुमान है। किसान मंडी के वर्तमान प्रारूप से संतुष्ट नहीं हैं।
गाजर उत्पादक किसान समिति के जिलाध्यक्ष अमरसिंह बिश्नोई ने बताया कि प्रथम चरण में कृषि विपणन बोर्ड द्वारा 30 फुट चौड़े और 10 फुट गहरे पांच टैंक बनाए जा रहे हैं। इन टैंकों पर केवल 60 मशीनें ही गाजर धुलाई के लिए लगाई जा सकेंगी, जबकि बाकी 250 मशीनों के मालिक और मजदूर बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि गाजर सीजन अभी शुरू हुआ है और उत्साह के कारण मशीनों की संख्या में करीब 100 का इजाफा होने की संभावना है। मंडी का निर्माण गंगनहर के साथ एलएनपी नहर की तीन किलोमीटर लंबी जगह पर हो रहा है, जो सिंचाई विभाग से कृषि विपणन बोर्ड को हस्तांतरित की गई है। इतनी बड़ी जगह होने के बावजूद केवल पांच टैंक बनाए जा रहे हैं, जो किसानों की जरूरतों को पूरा नहीं करेंगे।
संयुक्त किसान मोर्चा ने ज्ञापन के माध्यम से राज्य सरकार को कई सुझाव दिए हैं। सबसे प्रमुख सुझाव है कि उपलब्ध जगह की लंबाई के अनुरूप 30 फुट चौड़ी एक पक्की नहर बनाई जाए, ताकि 300-400 धुलाई मशीनें लगाई जा सकें और सभी को काम मिल सके। इसके अलावा, गंगनहर फीडर के ऊपर की पटरी से आने-जाने के लिए प्रत्येक एक किलोमीटर पर आर-पार गेट लगाए जाएं, ताकि 18 टायर वाले ट्रक और ट्रेलरों का आवागमन सुचारू रहे। मोर्चा ने साधुवाली में श्रीगंगानगर-अबोहर राष्ट्रीय राजमार्ग 62 से कालूवाला हैड बाईपास तक एक मिनी बाईपास बनाकर गंगनहर फीडर की पटरी से जोड़ने और मंडी की दोनों दीवारों के बाहर उत्तरी एवं दक्षिणी दिशाओं में एक रिंग रोड का निर्माण करने का भी सुझाव दिया है, ताकि भविष्य में यातायात सुगम बना रहे।
किसानों ने बताया कि साधुवाली में किसान इस कड़ाके की सर्दी में आधी रात से ही खेतों से गाजर लेकर आते हैं और अंधेरे में ही धुलाई शुरू हो जाती है। तड़के सब्जी व्यापारी नीलामी में गाजर खरीदते हैं। इसलिए मंडी में किसानों के लिए विश्राम स्थल भी बनाया जाए। संयुक्त किसान मोर्चा ने मांग की है कि इन समस्याओं के समाधान के लिए गाजर उत्पादक किसान समिति और कृषि विपणन बोर्ड की एक संयुक्त समिति गठित की जाए। अन्यथा केवल 20 प्रतिशत मशीनों को ही काम मिलेगा और 10 हजार हेक्टेयर में उत्पादित गाजर की धुलाई नहीं हो सकेगी, जिससे किसानों को भारी नुकसान होगा। समिति ने चेतावनी दी है कि जब तक इन सुझावों पर अमल नहीं किया जाता, तब तक मंडी का निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि पांच दिसम्बर को मुख्यमंत्री के शिलान्यास से पहले भी मंडी की एक दीवार को लेकर विवाद हुआ था। किसानों ने धरना दिया था, जिसके बाद प्रशासन के साथ समझौते में तय हुआ कि वैकल्पिक रास्ते का इंतजाम होने तक बाहरी चारदीवारी का निर्माण नहीं किया जाएगा। वह निर्माण अभी भी रुका हुआ है।
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