नयी दिल्ली , दिसंबर 09 -- देश में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से स्थापित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (एएएम) का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने यह जानकारी राज्यसभा में लिखित उत्तर के रूप में दी।

उन्होंने बताया कि 31 अक्टूबर 2025 तक देश में कुल 1,80,906 आयुष्मान आरोग्य मंदिर कार्य रहे हैं। ये केंद्र पहले आयुष्मान भारत स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (एबी-एचडब्ल्यूसी) के रूप में जाने जाते थे।

एएएम के माध्यम से लोगों को अपने नजदीकी उप-स्वास्थ्य केंद्रों (एसएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर ही 12 तरह की व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं। इनमें मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, संक्रामक व गैर-संचारी रोगों की जांच, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं, वृद्धजन देखभाल, मिर्गी और मनोभ्रंश जैसी तंत्रिका संबंधी स्थितियां, तंबाकू एवं शराब जैसी नशा मुक्ति सेवायें, मुख स्वास्थ्य, ईएनटी देखभाल तथा प्राथमिक आपातकालीन इलाज शामिल हैं।

सरकार ने बताया कि बेहतर सेवा सुनिश्चित करने के लिए एएएम पर दवाओं और जांचों की सूची बढ़ाई गई है। एसएचसी/पीएचसी स्तर पर 172 दवायें और 63 जांचें उपलब्ध कराई जा रही हैं। जबकि बड़े स्वास्थ्य केंद्रों पर 106 दवाएँ और 14 आवश्यक जांचें उपलब्ध हैं।

राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (एनपी-एनसीडी) के पोर्टल के अनुसार, 31 अक्टूबर 2025 तक देशभर में-38.79 करोड़ लोगों की उच्च रक्तचाप जांच, 36.05 करोड़ मधुमेह जांच, 31.88 करोड़ मुख कैंसर जांच, 14.98 करोड़ स्तन कैंसर जांच और 8.15 करोड़ सर्वाइकल कैंसर जांच की गई है।

सरकार के अनुसार व्यापक जांच कार्यक्रमों से गंभीर बीमारियों का समय से पता चल पा रहा है और इलाज जल्दी शुरू हो रहा है।

एएएम पर उपलब्ध ई-संजीवनी टेली-परामर्श सेवा ने ग्रामीण व दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच काफी बढ़ा दी है। 31 अक्टूबर 2025 तक 41.14 करोड़ टेली-परामर्श किए जा चुके हैं, जिससे लोगों को घर के पास ही विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह मिल रही है।

सरकार ने बताया कि कार्यक्रम की नियमित समीक्षा बैठकों, अधिकारियों के क्षेत्रीय दौरे और वार्षिक कॉमन रिव्यू मिशन (सीआरएम) के माध्यम से की जाती है।

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