वडोदरा , दिसंबर 04 -- गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत वडोदरा शहर के भायली क्षेत्र में आर्ष विद्या मंदिर द्वारा स्थापित श्री ओंकारेश्वर महादेव मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा तथा कुंभाभिषेक महोत्सव में गुरुवार को शामिल हुए।
श्री देवव्रत ने श्रीकृष्ण गौशाला का लोकार्पण कर गौ-पूजन भी किया और कहा कि भारत की प्राचीन वैदिक परंपरा और संतों-ऋषियों द्वारा दिया गया शाश्वत ज्ञान मानव जीवन का मूल आधार है। विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में मनुष्य ने बाहरी विजय तो प्राप्त की हैं, लेकिन काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और अज्ञान जैसे आंतरिक शत्रुओं पर विजय पाने का एकमात्र मार्ग आध्यात्मिकता और वैदिक ज्ञान है। इस ज्ञान को जीवित रखने में स्वामी श्री परमानंद तथा संपूर्ण गुरु-शिष्य परंपरा निरंतर प्रयत्नशील है।
उन्होंने आर्ष विद्या मंदिर द्वारा संचालित शैक्षणिक परंपरा की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां बालिकाओं को भगवद्गीता का अध्ययन करवाकर आध्यात्मिकता के साथ आधुनिक शिक्षा प्रदान की जाती है, जो राष्ट्र निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है। इसी परंपरा के एक भाग के रूप में गौशाला का नवनिर्मित भवन तथा गौ-आधारित प्राकृतिक खेती के कार्यक्रमों को उन्होंने भारतीय संस्कृति के पुनर्जीवन का प्रतीक बताया।
राज्यपाल ने कहा कि वेदों में गाय को विश्व की माता कहा गया है। रासायनिक खेती के कारण आज डायबिटीज, कैंसर, किडनी और पैनक्रियास के रोग तेजी से फैल रहे हैं, जो 50 वर्ष पहले समाज में थे ही नहीं। भूमि की उर्वरता नष्ट करने वाले यूरिया तथा रासायनिक खादों का त्याग कर गौ-आधारित शुद्ध स्वदेशी प्राकृतिक खेती अपनाना आज के समय की आवश्यकता है। उन्होंने आर्ष विद्या मंदिर तथा उसकी गुरु-शिष्य परंपरा द्वारा भारतीय संस्कृति, वैदिक ज्ञान और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे अमूल्य सेवा कार्यों की सराहना की। इस अवसर पर आर्ष विद्या मंदिर के संत-महंत और भक्त उपस्थित थे।
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