अहमदाबाद , नवंबर 07 -- गुजरात के अहमदाबाद के कृष्णनगर में शुक्रवार को आयोजित गौ-आधारित प्राकृतिक खेती मार्गदर्शन शिविर में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने प्राकृतिक खेती, गौ-संवर्धन और स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।

श्री देवव्रत ने धरती की वर्तमान स्थिति, रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव और प्राकृतिक खेती के लाभों का उल्लेख करते हुए कहा कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी का ऑर्गेनिक कार्बन बहुत कम हो गया है। रासायनिक खेती का नुकसान केवल भूमि तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह भोजन के माध्यम से धीमे जहर की तरह मनुष्य के शरीर में जा रहा है, जो स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालता है। हाल ही में हुए एक शोध में पाया गया है कि 105 माताओं के दूध में भी रसायनों के अंश पाए गए हैं अर्थात अब माताओं का दूध भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहा है।

राज्यपाल ने कहा कि देशी गाय आधारित प्राकृतिक खेती न केवल मानव स्वास्थ्य के लिए, बल्कि पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है। गुजरात के कृषि विश्वविद्यालयों में हुए तीन वर्षों के अनुसंधान से यह सिद्ध हुआ है कि प्राकृतिक खेती में पहले ही वर्ष से उत्पादन समान रहता है और इसके बाद लगातार बढ़ता चला जाता है।

उन्होंने हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित अपने गुरुकुल प्राकृतिक कृषि फार्म का उदाहरण देते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से केंचुए और सूक्ष्मजीव उत्पादन बढ़ाते हैं। वह वर्षा के पानी को जमीन में समाहित कर प्राकृतिक जल-संचयन प्रणाली का निर्माण करते हैं, जिससे अत्यधिक वर्षा होने पर भी फसलों को नुकसान नहीं होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन से किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरणा और सहयोग मिला है। गुजरात सरकार भी विभिन्न कार्यक्रमों और सहायता योजनाओं के माध्यम से इस दिशा में व्यापक प्रचार-प्रसार कर रही है।

सेक्सड-सॉर्टेड सीमन टेक्नोलॉजी का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में किसानों और पशुपालकों को उच्च गुणवत्ता वाला सीमन बहुत कम दरों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे दूध देने वाले पशुओं की नस्ल में सुधार होगा, दूध उत्पादन बढ़ेगा और बड़ी संख्या में मादा बछड़ियां जन्म लेंगी।

श्री आचार्य देवव्रत ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से अब पूरे प्रदेश में प्राकृतिक खेती से उत्पन्न उत्पादों की बिक्री के लिए व्यवस्था की जा रही है। अधिक से अधिक किसान प्राकृतिक खेती अपनाएं, यही समय की मांग है। उन्होंने जनता से अनुरोध किया कि यदि मांग होगी तो आपूर्ति अपने आप होगी, इसलिए सभी को चाहिए कि वह स्वस्थ जीवन के लिए केवल प्राकृतिक उत्पाद ही खरीदें।

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