अगरतला , नवंबर 01 -- त्रिपुरा में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी पार्टी टिपरा मोथा के संस्थापक और शाही उत्तराधिकारी प्रद्योत किशोर देबबर्मन ने पूर्वोत्तर क्षेत्रीय दलों के एक संयुक्त राजनीतिक मंच के गठन का संकेत देते हुए शनिवार को घोषणा किया कि अगले तीन दिनों में इस पहल पर एक बड़ा खुलासा होने की उम्मीद है।

श्री देबबर्मन ने बंगलादेश में राजनीतिक परिवर्तनों से संभावित खतरों पर चिंता व्यक्त करते हुए इस बात पर बल दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा को राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से ऊपर रखा जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि आगामी बंगलादेशी चुनावों के बाद एक भारत-विरोधी सरकार सत्ता में आ सकती है जिससे असम, मेघालय और त्रिपुरा जैसे पूर्वोत्तर राज्यों के लिए ख़तरा उत्पन्न हो सकता है।

सोशल मीडिया पर अपनी टिप्पणी में, मोथा प्रमुख ने विभिन्न क्षेत्रीय दलों के साथ चल रही बातचीत का उल्लेख किया और देश के अन्य क्षेत्रों के साथ समावेशी एवं संतुलित विकास के लिए पूर्वोत्तर राज्यों के बीच एकजुटता के महत्व पर बल दिया।

श्री देबबर्मन ने कहा, "केंद्र सरकार हमें तभी गंभीरता से लेगी जब हम अपने आंतरिक संघर्षों को समाप्त कर अपने समुदायों के लिए एकजुट मोर्चा प्रस्तुत करेंगे। हमारे बीच विभाजन होने से कि किसी भी पूर्वोत्तर राज्य को कुछ भी प्राप्त नहीं होगा। हालांकि, एकजुट होकर हम अपनी कम से कम आधी चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं।"उन्होंने त्रिपुरा के राजनीतिक हस्तियों से जुड़े नकली बंगलादेशी पहचान पत्रों की खबरों पर भी चिंता व्यक्त की और इसे बाहरी हितों को साधने वाली एक साज़िश करार दिया। उन्होंने बंगलादेश के चटगांव पहाड़ी इलाकों में हाल ही में पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों के देखे जाने का उल्लेख करते हुए दावा किया कि वे चिकित्सा सहायता के बहाने वहां मौजूद थे।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर वे वास्तव में मानवीय सहायता के लिए वहां गए होते तो हमें ब्रिगेडियर और जनरल नहीं बल्कि डॉक्टर दिखाई देते।" उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ढाका में कोई भी भारत विरोधी सरकार पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों, विशेष रूप से असम, मेघालय और त्रिपुरा को निशाना बना सकती है जिससे सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है।

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