कोझिकोड , मार्च 07 -- केरल में कोझिकोड जिले के वडकारा की 30 वर्षीय दृष्टिबाधित अभ्यर्थी जसीला जननाथ पी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में 397वीं रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प और मेहनत से बड़ी से बड़ी बाधा भी पार की जा सकती है।

सुश्री जसीला ने यह सफलता चौथे प्रयास में हासिल की और देशभर के दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा बन गईं। उन्होंने परीक्षा में समाजशास्त्र को वैकल्पिक विषय चुना था, जो सामाजिक मुद्दों और सामुदायिक विकास में उनकी गहरी रुचि को दर्शाता है। उन्होंने टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (टीआईएसएस), मुंबई से महिला-केंद्रित प्रैक्टिस में विशेषज्ञता के साथ सोशल वर्क में मास्टर्स डिग्री प्राप्त की है। सिविल सेवा की तैयारी में पूरी तरह जुटने से पहले जसीला ने कोझिकोड में प्रजाहिता फाउंडेशन में प्रोजेक्ट एसोसिएट के रूप में जुलाई 2021 से मार्च 2022 तक काम किया, जहां उन्होंने कई सामुदायिक परियोजनाओं में योगदान दिया।

दृष्टिबाधा के बावजूद विशाल पाठ्यक्रम से निपटने के लिए उन्होंने ऑडियो आधारित पढ़ाई, वॉइस-टू-टेक्स्ट तकनीक और सहपाठियों के साथ चर्चा जैसी रणनीतियों का सहारा लिया।

सुश्री जसीला ने कहा, "अंधापन ने मुझे चुनौती दी, लेकिन उसने मेरी पहचान तय नहीं की। सही मार्गदर्शन, तकनीक आधारित अध्ययन और सहयोगी समुदाय के साथ मैं अपना लक्ष्य हासिल कर सकी।"दिवंगत कुन्हाब्दुल्ला पी और गृहिणी सैनाबा की बेटी जसीला पढ़ाई के अलावा प्रतिभाशाली वक्ता भी रही हैं। स्कूल के दिनों में उन्होंने युवा उत्सवों में मिमिक्री, वंचिप्पाट्टु (नौका गीत), लोकगीत और मलयालम वाचन में ए ग्रेड हासिल किया था।

सुश्री जसीला ने अपनी सफलता का श्रेय एक वर्ष की गहन तैयारी और जाइलम आईएएस में मिले मार्गदर्शन को दिया, जहां उन्होंने मार्च 2025 में सिविल सेवा बैच जॉइन किया था। इस वर्ष यूपीएससी परीक्षा में जाइलम आईएएस के 29 छात्रों ने रैंक हासिल की है।

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