नयी दिल्ली , फरवरी 26 -- उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा है कि लोकतंत्र में दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना अपनी भावनाओं का सम्मान करना और इस तरह के आदान-प्रदान से राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।
श्री राधाकृष्णन ने गुरूवार को श्रीनगर में कश्मीर विश्वविद्यालय के 21वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालयों को भले ही बुनियादी ढांचे और अकादमिक उत्कृष्टता के लिए जाना जाता हो, लेकिन उनकी सच्ची विरासत उनके स्नातकों के चरित्र और योगदान में झलकती है। उन्होंने 1948 में स्थापित कश्मीर विश्वविद्यालय की गौरवशाली विरासत और बढ़ते अकादमिक प्रभाव की सराहना की।
उन्होंने छात्रों से निरंतर अनुकूलन करने, नए कौशल हासिल करने और नवाचार को अपनाने का आग्रह किया। भारत के प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नवप्रवर्तक के रूप में उभरने पर जोर देते हुए उन्होंने युवाओं को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप स्वदेशी नवाचारों को आगे बढ़ाने और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।
उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों जिनमें श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का विस्तार और चेनाब रेल पुल जैसी महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाएं शामिल हैं, उन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पहल नए अवसर पैदा करती हैं और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करती हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में श्रीनगर स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत देश का सबसे स्वच्छ शहर बनकर उभरेगा।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र में दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना अपनी भावनाओं का सम्मान करना, और इस तरह के आदान-प्रदान से राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है। उपराष्ट्रपति ने युवाओं से नशे से दूर रहने और सोशल मीडिया का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने युवाओं को याद दिलाया कि जीवन में उनकी सहनशीलता, साहस और चरित्र की परीक्षा कक्षा से परे भी होगी।
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