नैनीताल , फरवरी 18 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने यमुना व दून घाटी में प्रस्तावित सड़क निर्माण परियोजना में कथित रूप से हजारों पेड़ों के कटान से पर्यावरण, वन्य जीवों के साथ ही प्राकृतिक जल स्रोतों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर दायर जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), जैव विविधता बोर्ड, वन विभाग, प्रदेश और केंद्र सरकार से 03 सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।

इस मामले को देहरादून निवासी रीनू पाल की ओर से चुनौती दी गई है। साथ ही मुख्य न्यायधीश मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ में सुनवाई हुई।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि यमुना व दून घाटी में आशारोडी एवं झाझरा के बीच गतिमान सड़क परियोजना के लिए लगभग 07 हजार पेड़ों का कटान किया जाना प्रस्तावित है। याचिका में कहा गया है कि ग्रीन परियोजना के तहत गतिमान सड़क निर्माण से पूर्व उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड से अनुमति नही ली गई है।

बड़ी संख्या में पेड़ों के कटान से पर्यावरण के साथ ही वन्यजीवों पर इसका विपरीत असर पड़ेगा। आगे कहा गया कि यहां के जंगलों में बर्ड की 300 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं और हाथियों का बफर जोन होने के साथ ही यहां आसन बैराज भी मौजूद है। यहां हर साल कई देशों से विभिन्न प्रजाति के पक्षी आते हैं।

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