अगरतला , अक्टूबर 30 -- त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने गुरुवार को कहा कि राज्य ने पशुधन और डेयरी उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति की है और पूर्वोत्तर क्षेत्र में दूध उत्पादन में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

श्री साहा ने कहा कि त्रिपुरा निकट भविष्य में दूध और अंडा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए प्रयास करेगा। उन्होंने यहाँ आर.के. नगर स्थित पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय को देश के प्रमुख संस्थानों में से एक बनाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा, "दूध, अंडे और मांस उत्पादन के मामले में हमारी स्थिति अच्छी है। हमारा अगला लक्ष्य दूध और अंडा उत्पादन में पूर्ण आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार को सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करना चाहिए।"मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पशु चिकित्सा महाविद्यालय का बुनियादी ढांचा अन्य मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के बराबर है। यह समझना आवश्यक है कि पशु चिकित्सा विज्ञान मानव चिकित्सा से भी अधिक जटिल है, जिसके लिए विद्यार्थियों को व्यापक अध्ययन की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि वह नियमित रूप से कॉलेज की प्रगति की निगरानी करते हैं और संकाय की कमी को दूर करने को प्राथमिकता देते हैं।

उन्होंने कहा, "अतीत में त्रिपुरा में पशु चिकित्सा अध्ययन के लिए केवल एक या दो सीटें उपलब्ध थीं। आज, हमने काफी प्रगति की है और अब लगभग 66 सीटें प्रदान कर रहे हैं।" ग्रामीण विकास में पशुधन की महत्वपूर्ण भूमिका और वैश्विक पशुधन क्षेत्र में भारत की पर्याप्त उपस्थिति पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, "इस कॉलेज को एक ऐसे आदर्श संस्थान के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जिस पर विद्यार्थी और संकाय दोनों गर्व कर सकें। जैसे-जैसे हम एआई और 5जी के युग में आगे बढ़ रहे हैं, शिक्षकों और शिक्षार्थियों को समान रूप से नवीनतम प्रगति से अवगत रहना चाहिए।"उन्होंने राज्य की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि त्रिपुरा मौजूदा समय में प्रति व्यक्ति अंडा उपलब्धता के मामले में पूर्वोत्तर में सबसे आगे है और मांस उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल कर चुका है। उन्होंने हरित पशु आहार विकास परियोजना के कार्यान्वयन की घोषणा की, जिसके तहत लगभग 286 हेक्टेयर में हरे चारे की खेती शुरू की गई है। मुख्यमंत्री ने पशु संसाधन योजना के तहत बत्तख और मुर्गी पालन की पहल की शुरुआत पर भी प्रकाश डाला गया।

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