दुर्ग , मार्च 07 -- छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में मक्के की फसल के बीच चोरी-छिपे अफीम की खेती किए जाने का मामला सामने आया है। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को जेवरा-सिरसा चौकी क्षेत्र के समोदा और झिंझरी गांव की सीमा पर स्थित खेत में छापेमारी की। मौके पर करीब डेढ़ से दो एकड़ क्षेत्र में अफीम के पौधे पाए गए हैं, जबकि शुरुआती जानकारी के अनुसार खेत के बड़े हिस्से में लंबे समय से यह खेती किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
पुलिस ने कल देर रात यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार संबंधित खसरा नंबर 310 की जमीन का कुल रकबा लगभग नौ एकड़ से अधिक बताया गया है। भूमि स्वामी के रूप में मधुमति ताम्रकर और प्रीति बाला ताम्रकर का नाम सामने आया है। खेत में मक्के की फसल लगी हुई थी और उसी के बीच-बीच में अफीम के पौधे उगाए गए थे, जिससे बाहरी लोगों को शक न हो।
मामले में समोदा गांव के सरपंच अरुण गौतम ने आरोप लगाया है कि खेत में अफीम की खेती भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) किसान मोर्चा के पदाधिकारी विनायक ताम्रकर और बृजेश ताम्रकर द्वारा की जा रही थी। सरपंच का कहना है कि गांव के एक पंच ने इसकी सूचना पुलिस को दी थी, जिसके बाद उसके साथ मारपीट की घटना भी हुई।
वहीं विनायक ताम्रकर ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि जमीन खेती के लिए अधिया पर दी गई थी और उन्हें अफीम की खेती की जानकारी नहीं थी। उनका कहना है कि खेत में कुछ बाहरी लोग चोरी-छिपे खेती कर रहे थे, जिसकी जानकारी मिलने पर वे खुद मौके पर पहुंचे थे।
सूचना मिलने के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) ग्रामीण मणिशंकर चंद्रा के निर्देश पर पुलिस ने विशेष टीम बनाकर कार्रवाई की। मौके पर तहसीलदार और राजस्व विभाग के अधिकारी भी बुलाए गए और पौधों के नमूने एकत्र किए गए। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार बरामद अफीम की कीमत करोड़ों रुपये हो सकती है।
अंधेरा होने के कारण गुरुवार शाम को कार्रवाई आंशिक रूप से रोकनी पड़ी थी। कल फिर से पुलिस, प्रशासन और विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंचकर जांच की गयी। अधिकारियों के अनुसार जमीन के वास्तविक उपयोग, खेती करने वाले लोगों और पूरी साजिश की जांच की जा रही है।
दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बताया कि खेत में अफीम की खेती मिलने की पुष्टि हुई है और मामले से जुड़े कुछ लोगों से पूछताछ की जा रही है। पूरी जांच के बाद ही इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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