भोपाल , फरवरी 12 -- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि निर्माण केवल ईंट-पत्थर का संयोजन नहीं, बल्कि एक अभिनव कला है। इसमें उत्कृष्ट दृष्टिकोण के साथ दीर्घकालीन कार्य योजना अपनाई जानी चाहिए और गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को रवीन्द्र भवन में लोक निर्माण विभाग अंतर्गत मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा आयोजित इंजीनियर्स की एक दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया तथा भवन विकास निगम के प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम 2.0 पोर्टल का लोकार्पण किया। साथ ही निगम के ब्रोशर, मैनुअल, प्रशिक्षण कार्ययोजना 2026-27, न्यूज लेटर, रोड नेटवर्क मास्टर प्लान एवं बजट मॉड्यूल का विमोचन किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते समय के अनुरूप कन्सेप्चुअल और क्वालिटेटिव एप्रोच हर निर्माण कार्य में दिखाई देना चाहिए। इंजीनियर्स को भगवान विश्वकर्मा का साक्षात अवतार बताते हुए उन्होंने कहा कि कौशल संवर्धन और तकनीकी अद्यतनता समय की आवश्यकता है। पीएम गतिशक्ति योजना के माध्यम से नवाचारों को धरातल पर उतारा जा रहा है। पिछले दो वर्षों में लोक निर्माण विभाग ने अपने कार्यों के आधार पर विशिष्ट पहचान बनाई है।

कार्यक्रम में सड़क एवं भवन विकास कार्यों के लिए मध्यप्रदेश शासन और विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के बीच चार एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट नई दिल्ली, इंडियन एकेडमी ऑफ हाईवे इंजीनियर्स, इंजीनियरिंग स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया, आईआईटी मुंबई तथा स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर भोपाल शामिल हैं।

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि तकनीक, पारदर्शिता और गुणवत्ता से निर्माण तंत्र में सकारात्मक बदलाव आएगा। विभाग ने एक वर्ष का प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार किया है तथा 10 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले भवनों को ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं।

कार्यशाला में करीब दो हजार से अधिक अभियंता एवं तकनीकी अधिकारी उपस्थित रहे। राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों ने हरित भवन अवधारणा, आधुनिक निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण और नवाचार पर मार्गदर्शन दिया।

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