चेन्नई , दिसंबर 31 -- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को तमिलनाडु के मदुरै स्थित तिरुपरंकुंदरम पहाड़ी की चोटी पर कार्तिकेय दीपम जलाने के मामले में मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान न करने के लिए द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार की कड़ी निंदा की।

श्री प्रधान ने मदुरै के प्रसिद्ध मीनाक्षी-सुंदरेश्वर मंदिर में दर्शन के बाद मीडिया से कहा कि दीपम जलाने से कोई नहीं रोक सकता, क्योंकि भगवान शिव खुद इसका ख्याल रखेंगे। उन्होंने कहा, " पहाड़ी की चोटी पर दीपम जलाने के विवाद के लिए तमिलनाडु सरकार जिम्मेदार है। उच्च न्यायालय के फैसले को न मानना और सरकार की यह कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है, तथा बेहद निंदनीय है।"उल्लेखनीय है कि शिक्षा मंत्री रामेश्वरम में काशी तमिल संगमम 4.0 के समापन समारोह में भाग लेने के लिए पहुंचे थे, जिसके बाद आज वह मदुरै पहुंचे। उन्होंने कहा, " जैसे तिरुक्कुरल को तमिल संस्कृति और समाज से अलग नहीं किया जा सकता, वैसे ही तिरुपरंकुंड्रम भी तमिल समाज का अभिन्न अंग है। इस पहाड़ी की चोटी पर स्थित 'दीपथून' (पत्थर का खंभा) पर दीपम जलाना एक पुरानी परंपरा है।"श्री प्रधान ने कहा कि इस परंपरा को कोई नहीं रोक नहीं सकता। अगर कोई इसे रोकने की ठान ले, तो भगवान शिव उसे देख लेंगे।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तिरुपरंकुंदरम को 'दक्षिण की अयोध्या' बनाने की कोशिश के आरोपों के बीच, केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के बाद धर्मेंद्र प्रधान इस विवाद में कूदने वाले भाजपा के तीसरे बड़े नेता हैं। चूंकि विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने बचे हैं, इसलिए भाजपा इस विवाद को बनाये रखने की कोशिश कर रही है।

उल्लेखनीय है कि एक याचिकाकर्ता ने तिरुपरंकुंदरम पहाड़ी की चोटी पर स्थित एक पहाड़ी खंभे (दीपथुन) पर दीपम जलाने के लिए मद्रास उच्च न्यायालय से अनुमति मांगी थी, क्योंकि उनका कहना है कि परंपरा के अनुसार इसी जगह पर दीपम जलाया जाता था। उनकी इस मांग पर न्यायालय ने अनुमति दे दी थी। तमिलनाडु सरकार का हालांकि कहना है कि परंपरागत रूप से दीपम हमेशा पहाड़ी के बीच स्थित उचिप्पिल्लैयार मंदिर के पास जलाया जाता रहा है। न्यायालय के फैसले के बावजूद मंदिर प्रशासन ने उचिप्पिल्लैयार मंदिर के पास ही दीपम जलाया।

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