नयी दिल्ली , दिसंबर 06 -- दिल्ली विधान सभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि सच्चा सशक्तिकरण तब प्रारंभ होता है जब व्यवस्थाएँ मनुष्य की क्षमता, गरिमा और अवसर को ध्यान में रखकर बनें।
श्री गुप्ता ने शनिवार को यहाँ 'दिव्यालिम्पिक्स 2025: सेलिब्रेटिंग एबिलिटीज' कार्यक्रम में कहा कि दिव्यालिम्पिक्स योग्यता, सहभागिता और प्रदर्शन को सम्मानित करते हुए एक प्रगतिशील एवं गरिमापूर्ण समावेशन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है, साथ ही यह सुनिश्चित करता है कि अवसर संरचित, सम्मानजनक और सुलभ हों।
श्री गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में दिव्यांग जनों के प्रति भारत का दृष्टिकोण निर्णायक रूप से बदला है। प्रधानमंत्री द्वारा गरिमा, सशक्तिकरण और क्षमता को नीति-निर्माण के केंद्र में रखने से दिव्यांग नागरिकों के प्रति राष्ट्रीय दृष्टिकोण अधिक संवेदनशील और सक्षम हुआ है। उन्होंने 2015 में प्रारंभ किए गए 'सुगम्य भारत अभियान' का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी भवनों, सार्वजनिक परिवहन, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सूचना एवं संचार सेवाओं, मीडिया और शैक्षणिक संस्थानों में सुगमता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए गए हैं, जिसका उद्देश्य एक बाधा-रहित और समावेशी भारत का निर्माण करना है।
विधानसभा अध्यक्ष ने दिव्यांग छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति जैसी शैक्षणिक पहलों का भी उल्लेख किया, जो शिक्षा की निरंतरता और समान अवसर सुनिश्चित करती हैं। श्री गुप्ता ने कहा कि दिव्यालिम्पिक्स जैसे मंच आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धात्मक अनुभव प्रदान करते हैं, साथ ही सहभागिता को सामान्य बनाते हुए योगदान की अपेक्षा को सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांग व्यक्ति शिक्षा, खेल, रोजगार, सृजनात्मक क्षेत्रों और सार्वजनिक जीवन में निरंतर सार्थक योगदान दे रहे हैं, जिससे विविधता और संस्थागत क्षमता मजबूत होती है।
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