जयपुर , दिसंबर 03 -- राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ने दिव्यांग बच्चों को सामान्य से अधिक विशिष्ट बताते हुए कहा हैं कि उन्हें दया की नहीं समाज से मदद की जरूरत है।

श्री बागडे बुधवार को 'अभिव्यक्ति वेलफेयर सोसायटी' द्वारा आयोजित विश्व दिव्यांगता दिवस सम्मान समारोह में शामिल हुये। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों में यह विश्वास जगाए जाने की जरूरत है कि वे चाहे तो सब कुछ कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांग बच्चों को यदि अवसर प्रदान किए जाए तो वे आकाश छू सकते हैं। उन्होंने दिव्यांग बच्चों से संवाद भी किया।

उन्होंने कहा कि दिव्यांगों की मानसिक, बौद्धिक या संवेदी क्षमताएँ सामान्य व्यक्ति से अधिक होती हैं। उनके जीवन में सामान्य लोगों की तुलना में ज़्यादा चुनौतियां और बाधाएं होती हैं फिर भी वे अपने आपको निरंतर बेहतर साबित करते हैं।

राज्यपाल ने दिव्यांगों के अधिकारों और कल्याण लिए सभी को समर्पित होकर कार्य किए जाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दिव्यांग-बच्चे देवताओं के समान हैं। उनमें विशिष्ट गुण होते हैं। इसीलिए उन्हें 'वेदांगी' कहा गया है। उन्होंने बच्चों की प्रतिभा को आगे लाने पर जोर देते हुए कहा कि केन्द्र सरकार ने दिव्यांगों को विकास की मुख्यधारा में शामिल करने तथा उनके कौशल को पोषण देने एवं उनकी सुगमता और अधिकारों की सुरक्षा के लक्ष्य पर आधारित 'दिव्यांगजन अधिकार विधेयक -2016' पारित किया है। इस विधेयक के तहत दिव्यांग की श्रेणियों को सात से बढ़ाकर 21 किया गया है। उन्होंने बच्चों को हुनर से जोड़ने के लिए, कलाओं से संपन्न करने के लिए कार्य करने पर जोर दिया।

इससे पहले राज्यपाल ने विश्व दिव्यांग सम्मान के तहत चयनित बच्चों को सम्मानित किया।

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