लखनऊ , दिसम्बर 03 -- किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के फिजिकल मेडिसिन एवं रिहैबिलिटेशन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अमित कुमार गुप्ता ने कहा कि दिव्यांगजन हमारे समाज का अभिन्न हिस्सा हैं तथा उन्हें आत्मनिर्भर व सशक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की दिव्यांगता उसकी क्षमता को कम नहीं करती, बल्कि अवसर तथा साधनों की कमी उसे पीछे रखती है।
बुधवार को अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस पर किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के फिजिकल मेडिसिन एवं रिहैबिलिटेशन विभाग में सोमवार को विशेष जागरूकता व सशक्तिकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ केजीएमयू के अधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इसमें बड़ी संख्या में दिव्यांगजन, चिकित्सक, विशेषज्ञ और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो.अमित कुमार गुप्ता ने कहा कि "हमारा लक्ष्य हर दिव्यांगजन को ऐसी सुविधाएँ उपलब्ध कराना है कि वे अपने सपनों को पूरा कर सकें और आत्मसम्मान के साथ जीवन जी सकें"।
इस अवसर पर विभाग में आधुनिक पुनर्वास तकनीकों और उपकरणों का लोकार्पण किया गया। इनमें वर्चुअल रियलिटी सिस्टम फॉर रिहैबिलिटेशन शामिल है, जिसकी मदद से मरीज सुरक्षित वातावरण में चलना-फिरना, संतुलन बनाना और शारीरिक गतिविधियों का अभ्यास कर सकेंगे। इसके अलावा फुट प्रेशर एनालिसिस सिस्टम विथ इनसोल फैब्रिकेशन के जरिए चलने में समस्या वाले मरीजों के लिए वैज्ञानिक आधार पर इनसोल तैयार किए जाएंगे जो उन्हें बेहतर सहारा प्रदान करेंगे।
साथ ही वैक्यूम सक्शन मशीन विद एक्सेसरीज़ को विभाग में शामिल किया गया, जो कृत्रिम अंगों को अधिक आरामदायक और उपयोगी बनाने में मदद करेगी। इन नई तकनीकों के माध्यम से न सिर्फ इलाज की गति बढ़ेगी बल्कि मरीजों को बेहतर जीवन गुणवत्ता भी प्राप्त होगी।
प्रो. अमित गुप्ता ने बताया कि विविध प्रकार की शारीरिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को समाज में अक्सर कम आंका जाता है, जबकि सही सहयोग और प्रशिक्षण मिलने पर वे किसी भी क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि केजीएमयू का यह विभाग लगातार दिव्यांगजनों को पुनर्वास, परामर्श और तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है, जिससे वे खुद पर विश्वास करते हुए जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपना सकें।
कार्यक्रम के दौरान दिव्यांगजनों के लिए खेल प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की गईं, जिनमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। विजेताओं को सम्मानित किया गया और जरूरतमंद प्रतिभागियों को आवश्यक उपकरण भी प्रदान किए गए। साथ ही, विशेषज्ञों द्वारा दिव्यांग अधिकार, सरकारी सुविधाओं एवं चिकित्सकीय सहायता से संबंधित जानकारी दी गई।
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