नयी दिल्ली , जनवरी 10 -- इंडियन ट्रस्ट फॉर रूरल हेरिटेज एंड डेवलपमेंट (आईटीआरएचडी) की ओर से आयोजित 12वें वार्षिक शिल्प महोत्सव शनिवार को समापन हो गया।
चार दिवसीय इस महोत्सव ने राजस्थान के सीमावर्ती ज़िलों और पूर्वी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों के कारीगरों को सीधे शहरी बाज़ारों से जोड़ा। इसके कारण रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई और खरीदारों की मज़बूत भागीदारी देखने को मिली।
आईटीआरएचडी के अनुसार इस महोत्सव में कारीगरों को बिना किसी बिचौलिए के सीधे खरीदारों से संवाद और बिक्री का अवसर मिला। आयोजकों के अनुसार, प्रदर्शनी के दौरान कुल बिक्री 50 लाख रुपये से अधिक रही, जिससे यह संस्करण अब तक का सबसे सफल आयोजन बन गया।
महोत्सव में राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित बाड़मेर ज़िले के शिल्प के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को प्रदर्शित किया गया। बाड़मेर के कारीगरों ने कढ़ाई, एप्लिके कार्य, चमड़ा शिल्प, धरी बुनाई और अजरख प्रिंटिंग जैसी पारंपरिक कलाओं का प्रदर्शन किया। वहीं आज़मगढ़ के मुबारकपुर की हथकरघा बुनाई और निज़ामाबाद की प्रसिद्ध काली मिट्टी की कुम्हारी कला भी प्रदर्शनी का हिस्सा रहीं। इन प्रस्तुतियों ने एनसीआर के दर्शकों को उन शिल्प परंपराओं से परिचित कराया, जो भौगोलिक और आर्थिक रूप से हाशिए पर स्थित क्षेत्रों में विकसित हुई हैं।
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