नयी दिल्ली , फरवरी 06 -- राष्ट्रीय राजधानी में द्वारका जिले के पूर्व पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी शंकर चौधरी के खिलाफ जबरन वसूली, गैर-कानूनी हिरासत और आपराधिक दुराचार के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
दिल्ली में सतर्कता विभाग में दर्ज इस मामले में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप शामिल हैं, साथ ही अन्य प्रक्रियात्मक उल्लंघन भी हैं।
प्राथमिकी के अनुसार, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एसीपी) विनय कुमार मलिक के नेतृत्व में हुई जांच में चौधरी और मिजोरम पुलिस के एक कर्मी के बीच दिल्ली में बिना उचित दस्तावेज़ या न्यायिक मंजूरी के अनाधिकृत छापे और गिरफ्तारियां करने में कथित मिलीभगत के बारे में पता चला है। जांच के दौरान कई पुलिस अधिकारियों के बयानों से पुष्टि हुई कि चौधरी ने व्यक्तिगत रूप से एक नर्सिंग होम और एक निजी आवास पर छापे मारे, जहां संदिग्धों को हिरासत में लिया गया और बिना उचित प्रक्रिया के एक लॉकर और बैग जब्त किए गए।
प्राथमिकी में कहा गया है कि सीसीटीवी फुटेज में चौधरी और दिल्ली पुलिस के कर्मियों को हैरिसन नाम के एक व्यक्ति के घर में घुसते और सामान हटाते हुए दिखाया गया है, जिसका कोई आधिकारिक जब्ती रिकॉर्ड नहीं है। जांच में पाया गया कि चौधरी ने बिना अनुमति के दिल्ली पुलिस के संसाधनों, जिसमें एक आधिकारिक वाहन भी शामिल है, का इस्तेमाल किया और वसंत विहार में मिजोरम हाउस में कई दिनों तक लोगों को बिना कानूनी गिरफ्तारी या हिरासत रिकॉर्ड के रखा।
मामले में आगे की जांच जारी है।
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