सहारनपुर , मार्च 10 -- दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से जहां वाहन तेजी से फर्राटा भरते हुए कम समय में दूरी तय कर रहे हैं, वहीं सहारनपुर जिले में इसके किनारे स्थित सैकड़ों दुकानदारों, ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। कस्बा गागलहेड़ी से सुंदरपुर तक लगभग 25 किलोमीटर के दायरे में पहले देर रात तक चहल-पहल रहती थी। हजारों यात्रियों और वाहन चालकों की आवाजाही से चाय-पान, भोजन और अन्य खरीदारी के जरिए स्थानीय लोगों का कारोबार चलता था। एक्सप्रेस-वे बनने के बाद अधिकांश दुकानें फ्लाईओवर के नीचे आ गई हैं, जिससे ग्राहकों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है।

चमारीखेड़ा टोल के पास करोड़ों रुपये की लागत से बने एक भव्य रेस्टोरेंट के संचालक चंदन सिंह ने बताया कि एक्सप्रेस-वे बनने के बाद उनका कारोबार पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। छुटमलपुर निवासी रेस्टोरेंट मालिक इंद्रजीत अरोड़ा ने कहा कि एक्सप्रेस-वे के कारण उन्हें अपना कारोबार बंद करना पड़ा और अब वे कहीं अन्य स्थान पर व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहे हैं। इसी तरह छुटमलपुर के ढाबा संचालक सोनू ने भी अपना ढाबा बंद कर दिया है।

गांव रेहड़ी निवासी राजकुमार सैनी ने बताया कि उन्होंने चमारीखेड़ा में पिछले दस वर्षों से चल रहे अपने रेस्टोरेंट को बंद कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक्सप्रेस-वे बनने से सड़क किनारे स्थित जमीनों की कीमतों में भी भारी गिरावट आई है और करीब 25 किलोमीटर के दायरे में सैकड़ों ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों का कारोबार ठप हो गया है।

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