नयी दिल्ली , जनवरी 09 -- दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को कहा कि उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना का अभिभाषण कोई संसदीय रस्म अदायगी नहीं है, बल्कि यह उस नए गवर्नेंस मॉडल का रोडमैप है जिसमें दिल्ली को टकराव की राजनीति से निकालकर समन्वय, जवाबदेही और परिणाम आधारित शासन की ओर ले जाया जा रहा है।
श्रीमती गुप्ता ने आज दिल्ली विधानसभा में उपराज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा में कहा कि उनका अभिभाषण कोई संसदीय रस्म अदायगी नहीं है, बल्कि यह उस नए गवर्नेंस मॉडल का रोडमैप है, जिसमें दिल्ली को टकराव की राजनीति से निकालकर समन्वय, जवाबदेही और परिणाम आधारित शासन की ओर ले जाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज दिल्ली में केंद्र सरकार, उपराज्यपाल, नगर निगम और विभिन्न एजेंसियां आपसी टकराव में नहीं, बल्कि दिल्ली के विकास के लिए एकजुट होकर काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि यही वह मॉडल है, जिसे दिल्ली सरकार पूरे आत्मविश्वास के साथ जनता के सामने रख रही है। सरकार के निर्णयों में शोर नहीं, बल्कि समन्वय है, जहां घोषणाएं नहीं, बल्कि क्रियान्वयन है और जहां सत्ता प्रदर्शन नहीं, बल्कि सेवा का अभ्यास है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सर्वोदय, पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय और अटल बिहारी वाजपेयी के राष्ट्रवाद से प्रेरणा लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत-विकसित दिल्ली' के संकल्प को साकार करने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि फरवरी 2025 में जब उनकी सरकार बनी, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो वर्षों के अंधकार के बाद दिल्ली में नई रोशनी की किरण आई हो। बीते 15-20 वर्षों में दिल्ली की आबादी और जरूरतें तेजी से बढ़ीं, लेकिन पिछली सरकारें बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में पूरी तरह विफल रहीं जिससे सड़कें, अस्पताल, पानी, बिजली और परिवहन जैसी मूल व्यवस्थाएं लगातार चरमराती चली गईं। उनकी सरकार ने प्राथमिकताएं तय कीं, नीतियां बनाईं और शॉर्ट टर्म, मिड टर्म व लॉन्ग टर्म लक्ष्य निर्धारित कर योजनाबद्ध ढंग से काम शुरू किया। उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मात्र 11 महीनों के अल्पकाल में ही दिल्ली की दिशा बदलने में सरकार सफल रही है।
उन्होंने बताया कि शपथ ग्रहण के पहले ही दिन आयुष्मान भारत जैसी देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना को कैबिनेट में मंजूरी दी गई। बीते 11 महीनों में इस योजना के तहत चार लाख से अधिक लोगों का पंजीकरण हुआ। वरिष्ठ नागरिकों के लिए लाई गई 'वंदन योजना' में 10 लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा दी गई, जिसके अंतर्गत 2.62 लाख से अधिक लोगों का पंजीकरण हुआ और 19,200 से अधिक मरीजों को इलाज मिला। अब तक 32 करोड़ रुपये से अधिक के क्लेम का भुगतान किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे यह साफ जाहिर होता है कि दिल्ली की जनता इलाज के लिए कितनी परेशान थी और किस तरह वर्षों से उन्हें दर-दर भटकना पड़ता था।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली सरकार ने अस्पताल सूचना प्रबंधन प्रणाली लागू कर पूरे सरकारी अस्पताल तंत्र को डिजिटल किया। अब ऑनलाइन ओपीडी बुकिंग, डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन और इंटरलिंक्ड मेडिकल रिकॉर्ड के माध्यम से वह सारा भ्रष्टाचार बंद हो गया है। पहली बार दिल्ली स्टेट आयुष सोसायटी का गठन किया गया। इसके साथ ही स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन बनाकर ऑर्गन डोनेशन को व्यवस्थित प्लेटफॉर्म दिया गया।
उन्होंने बताया कि सरकार ने 500 पालना केंद्र शुरू किए, जहां कामकाजी महिलाएं अपने छोटे बच्चों को सुरक्षित वातावरण में छोड़कर काम पर जा सकती हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि 1300 नर्सिंग पद भरे गए और नर्सिंग इंटर्न का भत्ता 500 से बढ़ाकर 13,150 रुपये प्रतिमाह किया गया। इसके अलावा गंभीर दिव्यांगजनों की देखभाल के लिए 6000 रुपये प्रतिमाह सहायता योजना शुरू की गई। उन्होंने बताया कि दिल्ली में 100 अटल कैंटीन खोलने का लक्ष्य रखा गया है जिनमें 45 शुरू हो चुकी हैं, जहां पांच रुपये में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने यमुना की सफाई को लेकर भी अपना सरकार का रुख स्पष्ट किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना की सफाई एक जटिल प्रक्रिया है जिसे सतही उपायों से हल नहीं किया जा सकता। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों के समय से चली आ रही पुरानी तकनीक और निष्क्रिय सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (एसटीपी) को मुख्य चुनौती बताया। सड़कों की स्थिति सुधारने के लिए मुख्यमंत्री ने 'वॉल-टू-वॉल री-कारपेटिंग' योजना की घोषणा की। इसके तहत सड़कों को केवल ऊपरी तौर पर सुधारने के बजाय उनका पूर्ण पुनर्निर्माण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पिछली आम आदमी पार्टी सरकार दिल्ली को भारी वित्तीय और प्रशासनिक देनदारियों के बोझ तले छोड़ गई थी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने घोषणाएं तो खूब कीं, लेकिन उनके लिए आवश्यक वित्तीय प्रावधान नहीं किए, जिससे वर्तमान सरकार को न केवल विकास कार्य शुरू करने पड़े, बल्कि पुरानी देनदारियों को भी चुकाना पड़ रहा है।
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