नयी दिल्ली , दिसंबर 31 -- दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना द्वारा गठित संयुक्त सरकारी-उद्योग कार्य बल ने राजधानी में रियल एस्टेट क्षमता के विकास के लिए ग्रीन बिल्डिंग प्रमाणीकरण अनिवार्य करने की सिफारिश की है।

राष्ट्रीय रियल एस्टेट विकास परिषद (नरेडको) के दिल्ली चैप्टर द्वारा आयोजित दिल्ली डेवलपर्स मीट 3.0 में हुई चर्चाओं के बाद तैयार नीतिगत और नियामकीय सिफारिशों में कहा गया है कि एक निर्धारित निर्मित क्षेत्र से परे परियोजनाओं के लिए अनिवार्य ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन लागू किया जाये। साथ ही प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट रूप से परिभाषित प्रोत्साहन और दंड भी निर्धारित किये जायें। हालांकि सैद्धांतिक रूप से ग्रीन बिल्डिंग प्रमाणीकरण मौजूद हैं लेकिन अधिसूचित दिशानिर्देशों, विनियमों और कार्यान्वयन ढांचों के अभाव के कारण अब तक जमीनी स्तर पर उनके प्रभाव सीमित रहे हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर एक स्पष्ट ग्रीन बिल्डिंग नीति बनायी जाती है, तो सरकार अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) और ग्राउंड कवरेज जैसे फायदे दे सकती है। इससे डेवलपर्स को ग्रीन बिल्डिंग बनाने में आने वाले ज्यादा खर्च की भरपाई करने में मदद मिलेगी। ग्रीन सर्टिफाइड परियोजनाओं को पांच प्रतिशत तक अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो देने का सुझाव भी दिया गया है।

नरेडको दिल्ली के अध्यक्ष हर्ष वर्धन बंसल ने कहा कि अलग-अलग नियमों और सरकारी एजेंसियों में तालमेल की कमी के कारण दिल्ली की री-डेवलपमेंट क्षमता का पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है। ग्रीन बिल्डिंग और फ्लोर एरिया रेशियो से जुड़े सुझाव स्थिरता और आर्थिक फायदे के बीच संतुलन बनाते हैं। स्पष्ट नियमों से दिल्ली को ऑफिस, कमर्शियल और मिक्स्ड-यूज प्रोजेक्ट्स का मजबूत केंद्र बनाया जा सकता है।

टास्कफोर्स ने "ड्राफ्ट मास्टर प्लान दिल्ली 2041" में मौजूद कमियों को भी उजागर करते हुए कहा कि हरित भवन निर्माण मानदंडों पर सीमित जोर देने से डेवलपर्स के लिए अनिश्चितता पैदा होती है। इसके माध्यम से स्थिरता और दीर्घकालिक प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए भविष्य की योजना सामग्री में स्थिरता को और अधिक मजबूती से एकीकृत करने की सिफारिश की गयी।

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