सीहोर , मार्च 26 -- मध्यप्रदेश के सीहोर जिले की जावर तहसील मुख्यालय स्थित लगभग 500 वर्ष प्राचीन मां महिषासुर मर्दिनी मंदिर चैत्र नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि यहां विराजित मां की प्रतिमा दिन में तीन अलग-अलग रूपों में दर्शन देती है।
मंदिर के पुजारी दत्त प्रसाद के अनुसार सुबह के समय मां बाल अवस्था, दोपहर में प्रौढ़ अवस्था और शाम को वृद्धा स्वरूप में दिखाई देती हैं, जिसे श्रद्धालु विशेष चमत्कार के रूप में मानते हैं।
उन्होंने बताया कि नवरात्रि के अवसर पर देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। इंदौर-भोपाल मार्ग से लगभग तीन किलोमीटर अंदर स्थित यह मंदिर ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
मंदिर का इतिहास सेंधव समाज से जुड़ा बताया जाता है। मान्यता के अनुसार लगभग 500 वर्ष पूर्व यह क्षेत्र घने जंगल से घिरा हुआ था। सिंध से आए एक दल ने यहां रात्रि विश्राम किया, जहां एक व्यक्ति को मां महिषासुर मर्दिनी के दर्शन हुए। इसके बाद उस दल ने यहीं बसने का निर्णय लिया।
सेंधव समाज के खुमान सिंह पटेल के अनुसार बाद में यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। उस समय इस क्षेत्र का नाम जामुन था, जो बाद में बदलकर जावर हो गया। बताया जाता है कि करीब 30 वर्ष पहले मां की प्रतिमा ने चोला भी छोड़ा था।
मंदिर में स्थापित छह भुजाओं वाली मां की प्रतिमा में महिषासुर राक्षस का वध करते हुए स्वरूप दर्शाया गया है। नवरात्रि के दौरान यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
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