दावोस , जनवरी 22 -- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान अपने बहुप्रतीक्षित 'बोर्ड ऑफ पीस' (शांति बोर्ड) का औपचारिक अनावरण किया।

इस अंतरराष्ट्रीय निकाय के चार्टर पर हस्ताक्षर समारोह के दौरान श्री ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि यद्यपि उन्होंने अतीत में संयुक्त राष्ट्र की आलोचना की है, लेकिन वह चाहते हैं कि उनका यह नया बोर्ड संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर काम करे। उन्होंने कहा कि "एक बार जब यह बोर्ड पूरी तरह से गठित हो जाएगा, तो हम जो चाहें कर सकेंगे और हम इसे संयुक्त राष्ट्र के साथ तालमेल बिठाकर करेंगे।"श्री ट्रम्प ने अपने संबोधन में गाजा संघर्ष को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए हमास को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि हमास को अपने हथियार डालने होंगे, अन्यथा उनका अंत निश्चित है। उन्होंने दावा किया कि इजरायल-गाजा युद्ध अब अपने समाप्ति की ओर है और उनका शांति बोर्ड गाजा के पुनर्निर्माण तथा वहां एक स्थायी शांति व्यवस्था कायम करने में मुख्य भूमिका निभाएगा।

इस समारोह में 20 से भी कम देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, अर्जेंटीना और पराग्वे जैसे देश प्रमुख रहे। ब्रिटेन, फ्रांस और अन्य पश्चिमी यूरोपीय देशों ने इस समारोह से दूरी बनाए रखी, जिससे पश्चिमी देशों के बीच इस पहल को लेकर मतभेदों के संकेत मिले हैं।

श्री ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि वह रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के "काफी करीब" हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन और श्री जेलेंस्की दोनों ही अब इस संघर्ष को विराम देने के लिए समझौता करने के इच्छुक हैं। श्री ट्रम्प ने दोनों नेताओं के बीच व्याप्त "अत्यधिक नफरत" को समझौते की राह में बड़ी बाधा बताया, लेकिन साथ ही जोर दिया कि यदि वे समझौता नहीं करते हैं तो यह उनकी "मूर्खता" होगी।

समारोह की शुरुआत में श्री ट्रम्प ने घरेलू राजनीति और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की प्रगति का जमकर बखान किया। उन्होंने कहा कि जब "अमेरिका की अर्थव्यवस्था फलती-फूलती है, तो पूरी दुनिया का विकास होता है।" शांति बोर्ड के बारे में उन्होंने बताया कि इसमें कुछ अविश्वसनीय युवा नेता काम कर रहे हैं और यह पहले से ही बेहतरीन तरीके से काम करना शुरू कर चुका है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि गाजा के लिए उनकी शांति योजना को पिछले साल के अंत में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया था।

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