बैतूल , जनवरी 1 -- मध्यप्रदेश में बैतूल नगर पालिका की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। इस बार मामला किसी बड़ी योजना का नहीं, बल्कि एक ऐसी आरओ वॉटर कूलिंग मशीन का है, जिसे एक बैंक ने सामाजिक दायित्व के तहत नगर पालिका को भेंट किया था। उद्देश्य स्पष्ट था कि नगरपालिका परिसर में आने वाले नागरिकों और कर्मचारियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा सके, लेकिन लापरवाह सिस्टम और जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण यह मशीन आज कबाड़ में पड़ी धूल फांक रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त आरओ मशीन लंबे समय तक नगरपालिका परिसर में एक पेड़ के नीचे रखी रही। न तो इसे स्थापित करने के लिए कोई स्थान तय किया गया और न ही बिजली व पानी के कनेक्शन की व्यवस्था की गई। अंततः कनेक्शन नहीं होने का हवाला देकर मशीन को उठाकर कबाड़ में डाल दिया गया, जहां यह अब भी अनुपयोगी अवस्था में पड़ी हुई है।
विडंबना यह है कि जिस नगर पालिका पर पूरे शहर के लिए पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदारी है, उसी कार्यालय के कर्मचारी अपनी जेब से पैसे खर्च कर आरओ का पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं। रोजाना सैकड़ों नागरिक विभिन्न कार्यों से नगरपालिका पहुंचते हैं, लेकिन वहां शुद्ध पेयजल की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। यदि यह मशीन चालू होती, तो आम लोगों और कर्मचारियों दोनों को राहत मिल सकती थी।
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