मुंबई , नवंबर 03 -- जैन मुनि नीलेश चंद्र ने दादर में कबूतर आश्रय और मुंबई में इसी तरह की सुविधायें फिर से खोलने की मांग को लेकर मंगलवार को आज़ाद मैदान में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया। इस विरोध प्रदर्शन में शहर में कबूतरों के कल्याण के लिए चिंतित जैन मुनि और समुदाय के सदस्यों ने भी भाग लिया और समर्थन दिया।
चंद्र ने कहा कि जैन समुदाय की अहिंसा और सभी जीवों के प्रति करुणा पर आधारित एक दीर्घकालिक परंपरा है और उन्होंने दादर सहित कई स्थानों पर कबूतर आश्रयों को हटाए जाने और बंद किए जाने पर दुख व्यक्त किया। उनके अनुसार, निर्धारित भोजन स्थल बंद होने के कारण कबूतर भूखे और असुरक्षित हो गए हैं, जिससे पक्षियों के लिए कठिनाई पैदा हो रही है।
उन्होंने कहा कि हालाँकि मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर जैन समुदाय के साथ बातचीत के लिए वार्ताकार नियुक्त किए थे, लेकिन कोई सार्थक संवाद या समाधान की दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जो लोग गायों और कबूतरों जैसे निर्दोष प्राणियों पर अन्याय करते हैं, उन्हें सत्ता में बने रहने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इसी विश्वास के कारण उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर भी भूख हड़ताल की।
साधु के साथ आए प्रदर्शनकारियों ने चिंता जताई कि कबूतरों के दाना-पानी के स्थानों को बंद करने से पक्षियों की भलाई और अस्तित्व को खतरा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि दादर कबूतरखाना और इसी तरह की सुविधाएँ पक्षी आबादी के लिए महत्वपूर्ण सहारा हैं और इन्हें तुरंत बहाल किया जाना चाहिए।
विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए, राज्य मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा कि सरकार जैन धर्मगुरुओं का सम्मान करती है और साधु के बारे में कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं करेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रशासन मामले की सकारात्मक समीक्षा कर रहा है और जल्द ही कोई निर्णय होने की उम्मीद है। लोढ़ा ने ज़ोर देकर कहा कि सरकार उठाई गई चिंताओं के प्रति सहानुभूति रखती है, लेकिन उसे अपना रुख़ अंतिम रूप देने से पहले इस मुद्दे के सभी पहलुओं की जाँच करनी चाहिए।
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