बालेश्वर , फरवरी 12 -- ओडिशा के सोरो स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दहेज हत्या के मामले में पति और उसके माता-पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला साल 2012 का है, जिसमें ससुराल पक्ष पर बहू को जहर देकर मारने का आरोप सिद्ध हुआ है।

न्यायाधीश मीनाक्षी दास की अदालत ने दोषियों पर 10,000-10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में उन्हें आठ महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। सजा पाने वाले दोषियों की पहचान सिमुलिया गांव निवासी संतोष बारिक और उसके माता-पिता बिनोद बारिक और संजुमणि बारिक के रूप में हुई है।

अभियोजन पक्ष के दस्तावेजों के अनुसार, संतोष का विवाह साल 2010 में खड़गपुर गांव की स्वप्ना बारिक के साथ हुआ था। शादी के कुछ समय बाद ही संतोष और उसके माता-पिता ने स्वप्ना को अतिरिक्त दहेज के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। प्रताड़ना का यह सिलसिला तब समाप्त हुआ जब संदिग्ध परिस्थितियों में जहर खाने से स्वप्ना की मौत हो गई।

स्वप्ना की मृत्यु के बाद उसके पिता गंगाधर बारिक ने 30 जून 2012 को सोरो पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की कई और दहेज निषेध अधिनियम की धारा 4 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था।

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