अलवर , मार्च 17 -- सोशल मीडिया के जरिए विश्वभर में ठगी के नेटवर्क चलाने वाली कंपनियों में भारत के भी युवा जॉब करते हैं जो दलाल के माध्यम से विदेशों में नौकरी करने जाते हैं, लेकिन वे वहां अपराध की दुनिया में फंसा दिये जाते हैं।
ऐसे ही एक अलवर के युवा की कहानी जो अपने परिचित के माध्यम से म्यांमार चला जाता है और वहां साइबर धोखाधड़ी की दुनिया में धकेल दिया जाता है। पिछले ही महीने उनके चंगुल से छूट कर वह अपने घर आया और वहां की स्थिति बयां की। वह म्यांमार से अकेला नहीं बल्कि भारत के 270 और भी लोग हैं जो भारत वापस आए हैं, जिनमें करीब 25 राजस्थान के थे।
म्यांमार से भारत लौटे 270 भारतीयों में अलवर का अमन सुरक्षित अपने घर वापस लौट चुका है। अमन जिस मकसद से वहां पहुंचा लेकिन ठगी के जाल में बांध दिया गया। उसने बताया कि वह पिछले वर्ष पांच सितम्बर को म्यांमार में पहुंचा। जाते ही उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया। उसे म्यांमार में ठगी के कॉल सेंटर पर पहुंचा दिया गया।
अमन ने बताया कि वे लोग सुंदर मॉडल लड़कियों की फर्जी सोशल मीडिया पर आईडी बनाकर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन फ्रांस सहित अलग-अलग देश में रहने वाले भारतीय लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। उसके बाद पैसे निवेश करने के नाम पर उनके बैंक अकाउंट को खाली करते थे। बाकायदा ट्रेडिंग एप के जरिए लुभावने ऑफर देकर इंडियन को फांसते थे। हर तरीके से ग्राहकों का विश्वास जीतने का प्रयास किया जाता था। सुंदर लड़कियां भी इसी जॉब में रखी गई थी। उनकी सुंदरता से ग्राहक आसानी से फंस जाता था । अश्लील बातें करके ग्राहकों को फांसते थे।
अमन ने बताया कि आरोपी टेलीग्राम, वाट्सअप, फेसबुक, इंस्टाग्राम ऐड के माध्यम से शेयर मार्किट के नाम पर असली ऐप से मिलते जुलते फेक ट्रेडिंग ऐप और वेबसाइट बनाकर वाट्सअप, टेलीग्राम ग्रुप में जोड़कर साईबर धोखाधड़ी करते थे। म्यांमार से दुनिया के अलग-अलग देश एवं शहरों में रहने वाले लोगों से करोड़ों रुपए की ठगी होती है। वहां चलने वाले हाईटेक कॉल सेंटर में भारत-पाकिस्तान बंगलादेश सहित अलग-अलग देशों के युवा काम करते हैं। नौकरी के बहाने इन युवाओं को वहां बुलाया जाता है और उसके बाद ठगी के काम में धकेला जाता है।
उसने बताया कि एक दिन म्यांमार सुरक्षा बलों का छापा इस कंपनी के कॉल सेंटर पर पड़ा। वहां मौजूद चीनी नागरिक तो भाग लिए। वहां मौजूद लोगों ने भारतीय एंबेसी को मेल भेज कर मदद की गुहार लगाइ। उसके बाद उनको वहां से निकालकर एक शिविर में रखा गया। तो वहां से 270 भारतीय युवाओं को निकाला गया और उनको भारत भेजा गया।
अमन ने बताया कि कंपनी के लोग व्यावसायिक तरीके से इंटरव्यू लेकर युवाओं को अपने जाल में फंसाते थे। उसको 70 हजार रुपए सैलरी का आश्वासन दिया गया। उसको एग्रीमेंट ऑफर लेटर दिया गया। प्रतिदिन उसकी तीन लोगों को अपने जाल में फांसना होता था। अगर वो लोगों को अपनी जाल में नहीं फंसाता था , तो उसकी सजा मिलती थी।
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