नयी दिल्ली , जनवरी 03 -- बीसवीं सदी के शुरुआती दौर के देश के दूरदर्शी उद्योगपतियों में शुमार सर श्री राम के नेतृत्व में स्थापित श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स की यात्रा का प्रारंभ एक साधारण शिक्षण संस्था जैसा ही था, लेकिन आज यह वाणिज्य और अर्थशास्त्र की शिक्षा के सबसे प्रतिष्ठित केंद्रों में गिना जाता है।
इस महाविद्यालय से निकले होनहार विद्यार्थियों की एक लंबी सूची है जो देश के शासन-प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं और जिन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था और इसके नीति नियोजन एवं प्रबंधन में महती योगदान दिया है।
सर श्री राम के नेतृत्व में देश के सात अग्रणी कारोबारियों ने सन् 1920 में दिल्ली में कमर्शियल एजुकेशन ट्रस्ट की स्थापना की। उस समय देश औपनिवेशिक शासन के अधीन था और यहां की अर्थव्यवस्था ब्रिटेन पर निर्भर थी। राष्ट्र की आकांक्षाओं पर साम्राज्य की सेवा का बंधन था। ऐसे समय में उद्योगपति श्री राम ने शांत लेकिन क्रांतिकारी संस्थान का सपना संजो कर उसे साकार करने का बीड़ा उठाया था जो कॉमर्स (वाणिज्य शास्त्र) के शिक्षण-प्रशिक्षण को एक सहायक विधा के रूप में नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय आवश्यकता के रूप में देखेगा, इसे एक ऐसा विषय मानेगा जो आर्थिक आत्मनिर्भरता पैदा करने में सक्षम हो।
यह वह दौर था जब भारत का नया उभरता नेतृत्व आर्थिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने और उद्यमियों का एक ऐसा वर्ग तैयार करने के लिए उत्सुक था जो 'आधुनिक भारत के नये मंदिर' - कल-कारखाने, खदानें और अनुसंधान संस्थान स्थापित करेंगे, जो एक अधिक समृद्ध भारत का निर्माण करेंगे। सर श्री राम ने अपने बहनोई लाला शेर सिंह, अपने दोस्त लाला दीवान चंद और सहयोगियों के साथ एक छोटा सा समूह बनाया। देश को राजनीतिक स्वतंत्रता मिलने से बहुत पहले उन्होंने सोच लिया था कि व्यापार, वित्त और अर्थशास्त्र की अच्छी शिक्षा आधुनिक भारत को आकार देने में मदद करेगी।
सर श्री राम का मानना था कि कॉमर्स सिर्फ़ मुनाफा कमाने के लिए नहीं है, बल्कि यह लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप नये भारत के निर्माण का एक अनिवार्य माध्यम है। साल 1926 में इस विचार के साथ ही कमर्शियल कॉलेज की स्थापना हुई जो दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध था। दिल्ली के दरियागंज इलाके में इसे किराये के एक मकान में मामूली तरीके से शुरू किया गया। पहले बैच में सिर्फ़ 12 छात्र थे।
वर्ष 1951 में इसका नाम बदलकर श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स कर दिया गया। तीन साल बाद यह दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तरी परिसर में पहुंच गया। तत्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (जो बाद में राष्ट्रपति बने) ने इस महाविद्यालय के परिसर का उद्घाटन किया था। यह इस बात का एक प्रमाण था कि कॉमर्स की शिक्षा ने अपना स्थान प्राप्त कर लिया है और इसे भारत की बौद्धिक जिंदगी के केंद्र में रखा जा रहा है।
इस संस्था की स्थापना के समय इसकी कोई बड़ी इमारत नहीं थीं, प्रतिष्ठा का कोई वादा नहीं था, सिर्फ़ एक विचार था जो अनुशासन, कड़ी मेहनत और असली अर्थव्यवस्था से जुड़ा था। एक सदी बाद एसआरसीसी के नाम से विख्यात श्री राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स में आज 3,000 से ज़्यादा विद्यार्थी और लगभग 150 अकादमिक स्टॉफ हैं। दुनिया भर में इसकी ख्याति कॉमर्स और अर्थशास्त्र की शिक्षा के एक प्रमुख भारतीय संस्थान के रूप में है। इसे देश के आर्थिक नेतृत्व में सबसे महत्वपूर्ण योगदान देने वाली संस्था के रूप में देखा जाता है।
एसआरसीसी से पिछले कुछ दशकों में ऐसे-ऐसे विद्यार्थी निकले हैं जिन्होंने देश-विदेश में अपनी योग्यता और काम के बल पर अलग पहचान बनायी है। उनमें से कई ने कंपनियों के बोर्डरूम, बाज़ार, नीति निर्माण और न्यूज़ रूम को आकार दिया है। यहां से पढ़े स्वर्गीय श्री अरुण जेटली देश के सबसे प्रभावशाली वित्त मंत्रियों में गिने जाते हैं। श्री अंशु जैन, ड्यूश बैंक के पूर्व सह-मुख्य कार्यकारी, श्री प्रमोद भसीन, जेनपैक्ट के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), रिलायंस के अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएडी) के अमिताभ झुनझुनवाला और इंडिया टीवी के संस्थापक रजत शर्मा भी इसके पूर्व विद्यार्थी हैं। इस कॉलेज से निकले कई विद्यार्थी भारती एयरटेल, डालमिया सीमेंट, डेलॉइट जैसी ग्लोबल कंपनियों में वरिष्ठ पदों पर हैं, और वित्त तथा नीति निर्माण में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
यहां के पूर्व छात्र रुचिर शर्मा (अब रॉकफेलर इंटरनेशनल के चेयरमैन) उभरते बाज़ारों पर विश्व में सबसे जानी-मानी आवाज़ों में से एक हैं। उच्चतम न्यायालय के अर्जन सिकरी और रोहिंगटन फली नरीमन भी इस कॉलेज में थे। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल जो समकालीन नीति निर्माण में एक प्रभावशाली व्यक्तित्व हैं, वह भी यहां के पढ़े हैं। श्री जितिन प्रसाद और श्री विजय गोयल जैसे राजनीतिज्ञों को भी इस कॉलेज ने दिशा दी है।
कुल मिलाकर यह संस्था एक प्रभावशाली नेटवर्क बनाती है जिसमें भारत के एक नियंत्रित अर्थव्यवस्था से उठकर विश्व स्तर पर सराही जा रही अर्थव्यवस्था बनने की भी झलक दिखती है। इस तरक्की ने हाल के वर्षों में नयी गति पकड़ी है। इस संस्थान ने शुक्रवार को एक शानदार समारोह में अपने पूर्व विद्यार्थियों की सफलता की कहानी का जश्न मनाया। समारोह में दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने इस कॉलेज को 'विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित ब्रांड' बताया और कहा कि इस संस्थान का योगदान सिर्फ रैंकिंग से नहीं मापा जा सकता।
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