दंतेवाड़ा , जनवरी 05 -- छत्तीसगढ़ के दंतेवाडा के कुआकोंडा विकासखंड के ग्राम मोकपाल स्थित पोटाकेबिन आश्रम में अध्ययनरत आदिवासी बच्ची नम्रता कश्यप की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर जिले में आक्रोश का माहौल है।
इस घटना को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी दंतेवाड़ा ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था और आश्रम प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मृतका कक्षा तीसरी की छात्रा थी। खेलते समय पैर में मामूली चोट लगने के बाद प्राथमिक चिकित्सा के दौरान उसकी चोट को कथित तौर पर गंभीर नहीं माना गया। बाद में तबीयत बिगड़ने पर उसे दोबारा अस्पताल ले जाया गया, जहां इंजेक्शन और दवाइयां दी गईं लेकिन अंततः सोमवार सुबह आदिवासी बच्ची नम्रता कश्यप की मौत हो गई।
घटना से जुड़ी जानकारी के अनुसार नौ वर्षीय नम्रता कश्यप, पिता छानू राम, आश्रम परिसर में खेलते समय घायल हुई थी। आश्रम प्रबंधन द्वारा सुबह करीब नौ बजे उसे उपचार के लिए गुडरा ले जाया गया, जहां प्राथमिक जांच के बाद चिकित्सकीय रूप से कोई गंभीर स्थिति नहीं बताई गई। इसके पश्चात बच्ची को वापस आश्रम लाया गया लेकिन कुछ घंटों बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। स्थिति गंभीर होने पर शाम करीब पांच बजे उसे कुआकोंडा के उपस्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां दवाइयों और इंजेक्शन के माध्यम से उपचार किया गया। इसके बावजूद राहत नहीं मिलने पर रात करीब नौ बजे उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान आज सुबह उसकी मौत हो गई।
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