दंतेवाड़ा , दिसंबर 04 -- छत्तीसगढ़ में जिला पंचायत दंतेवाड़ा में गुरुवार को प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई और फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) के विषय में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस प्रशिक्षण में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों के सरपंच, सचिव एवं स्वच्छताग्राहियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम से संबंधित विस्तृत जानकारी देते हुए राज्य सलाहकार डॉ. रूपेश कुमार राठौर और पुरुषोत्तम पंडा ने प्रतिभागियों को प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन, संग्रह, रीसाइक्लिंग और सुरक्षित निपटान की पूरी प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक का अनियंत्रित उपयोग पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है, इसलिए पंचायत स्तर पर इसके प्रभावी नियंत्रण और प्रबंधन की अत्यंत आवश्यकता है। इसी क्रम में एफएसटीपी की कार्यप्रणाली, इसकी उपयोगिता और गांवों में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाने में इसकी भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने प्लांट के संचालन के दौरान अपनाई जाने वाली तकनीकी सावधानियों के बारे में भी प्रतिभागियों को जानकारी दी।

प्रशिक्षण सत्र में शामिल तीनों जिलों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित स्वच्छता गतिविधियों, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं पर विचार साझा किए। कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य प्लास्टिक मुक्त ग्राम की दिशा में ठोस कदम उठाना, ग्रामीण स्तर पर स्वच्छता प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना तथा पंचायत प्रतिनिधियों और स्वच्छताग्राहियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना था। प्रशिक्षण के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अपने क्षेत्रों में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन और एफएसटीपी संचालन को प्रभावी बनाने का संकल्प लिया।

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