दंतेवाड़ा , जनवरी 15 -- छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के युवाओं और आत्मसमर्पित नक्सलियों को स्वरोजगार के साथ मुख्यधारा में जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत यहां आयोजित उद्यमिता विकास कार्यक्रम (एंट्रप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम) के दसवें चरण का प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
यह कार्यक्रम सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) और छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की संयुक्त उद्यमिता प्रोत्साहन पहल 'राइजिंग एंड एक्सीलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस' (आरएएमपी) योजना के अंतर्गत चलाया जा रहा है।
कार्यक्रम के समापन सत्र का उद्घाटन जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र (डीटीआईसी) के महाप्रबंधक द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में एमएसएमई क्षेत्र की देश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला और बताया कि आरएएमपी योजना नवोदय उद्यमियों के तकनीकी उन्नयन, क्षमता निर्माण, बाजार विस्तार और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में कारगर भूमिका निभा रही है।
प्रशिक्षण सत्र का संचालन चॉइस कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के विशेषज्ञों द्वारा किया गया, जिन्होंने उद्यमिता के मूल सिद्धांतों को सरल व व्यावहारिक भाषा में प्रतिभागियों को समझाया। विशेष रूप से आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने और उन्हें स्वावलंबी बनाने पर इस सत्र में ध्यान केंद्रित रहा। प्रतिभागियों ने व्यवसाय योजना बनाने, वित्तीय प्रबंधन और बाजार संपर्क जैसे विषयों पर गहन प्रश्न पूछे, जिनके जवाब विशेषज्ञों ने दिए।
इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य प्रतिभागियों में आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करना और एमएसएमई क्षेत्र में व्यवसाय स्थापित करने की जटिल प्रक्रिया को सरल बनाना था। लाइवलीहुड कॉलेज द्वारा संचालित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जिले में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और सामाजिक-आर्थिक समावेशन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक सार्थक कदम माना जा रहा है। आगामी दिनों में प्रतिभागियों के लिए उन्नत उद्यमिता कौशल विकसित करने हेतु इसी तरह के प्रशिक्षण सत्र जारी रखने की योजना है।
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