दंतेवाड़ा , जनवरी 13 -- छत्तसीगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट से निपटने की दिशा में दंतेवाड़ा जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल की है। जिला प्रशासन ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आसीसीडब्ल्यू-आईआईटी मद्रास) के अंतरराष्ट्रीय स्वच्छ जल केंद्र के सहयोग से जिले में दो अत्याधुनिक जल शोधन परियोजनाओं की शुरुआत की है।

ये परियोजनाएं जिले की दो प्रमुख जल समस्याओं, भूजल स्तर में अत्यधिक गिरावट एव आयरन युक्त दूषित पानी का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करती हैं।

कुआकोंडा विकासखंड के महारा पारा क्षेत्र में भूजल स्तर एक हजार फीट से भी नीचे चले जाने के कारण पारंपरिक बोरवेल से पेयजल उपलब्ध कराना संभव नहीं था। इस चुनौती के समाधान के रूप में यहां वायु जल परियोजना स्थापित की गई है। यह तकनीक वातावरण में मौजूद नमी को संग्रहित कर उसे संघनित और शुद्ध करके पेयजल में परिवर्तित करती है।

इस संयंत्र के संचालन के लिए न्यूनतम 33 प्रतिशत आर्द्रता और 25 डिग्री सेल्सियस तापमान आवश्यक होता है। यह प्रक्रिया औसतन फरवरी माह से निरंतर कार्य करती है। परियोजना से प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है, जिससे गांव पेयजल के मामले में आत्मनिर्भर बन रहा है और भूजल पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ रहा है।

दूसरी ओर, किरंदुल-बचेली क्षेत्र से प्रभावित ग्राम हीरोली में भूजल में आयरन की अधिकता लंबे समय से ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बनी हुई थी। इस समस्या के समाधान के लिए ग्राम हीरोली में विशेष आयरन रिमूवल संयंत्र स्थापित किया गया है।

इस संयंत्र के माध्यम से पानी में घुले आयरन को प्रभावी ढंग से हटाया जा रहा है, जिससे पानी के रंग, स्वाद और गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। शुद्ध पेयजल उपलब्ध होने से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

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