अगरतला , फरवरी 11 -- त्रिपुरा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप आवारा कुत्तों और दूसरे जानवरों पर लगाम लगाने के लिए पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम 2023 के तहत कदम उठाने का फैसला किया है।
पशु संसाधन विकास विभाग की सचिव दीपा डी नायर ने कहा कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, जानवरों की भलाई को बढ़ावा देने और आबादी पर सतत नियंत्रण के लिए बहु-विभागीय पहल शुरू की गयी है।
नये नियमों के तहत आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण अनिवार्य कर दिया गया है। इन उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन की सुविधा के लिए नगरपालिका और स्थानीय प्राधिकरण पशु संसाधन विकास विभाग समन्वित रूप से राज्य भर में पशु जन्म नियंत्रण केंद्र और पशु आश्रयों की स्थापना कर रहे हैं।
सुश्री दीपा ने जानकारी दी कि अगरतला नगर निगम ने हपानिया में एक पशु जन्म नियंत्रण केंद्र का उद्घाटन किया है, जबकि आर के नगर में एक परिचालित पशु आश्रय मौजूद है। अन्य क्षेत्रों में इसी तरह की संरचनाएं विकसित की जा रही हैं, जिन्हें पशु कल्याण संगठनों की सहभागिता और समर्थन प्राप्त हैं।
निगरानी प्रयासों को बढ़ाने के लिए, विद्यालयों, अस्पतालों, बस टर्मिनलों और रेलवे स्टेशनों जैसे संवेदनशील, उच्च-यातायात क्षेत्रों में नोडल अधिकारियों को नियुक्त किया गया है। राजमार्ग सुरक्षा चिंताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ आवारा पशुओं को नियंत्रित और प्रबंधित करने के लिए निरंतर निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणालियों की शुरुआत का उल्लेख किया।
राजमार्गों पर चिह्नित आवारा पशुओं को खाना-पानी और पशु चिकित्सा समर्थन वाले तय आश्रयों और गोशालाओं में सुरक्षित रूप से स्थानांतरित किया जा रहा है। इसके अलावा आवारा जानवरों से संबंधित मुद्दों की रिपोर्ट करने के लिए जनता के लिए समर्पित हेल्पलाइन शुरू की गयी हैं।
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