अगरतला , फरवरी 05 -- त्रिपुरा में पिछले सात वर्षों के दौरान फूलों की खेती (फ्लोरीकल्चर) के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति देखी गई है, जिससे राज्य के हजारों किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने गुरुवार को बताया कि केंद्र सरकार की किसान-हितैषी नीतियों और राज्य सरकार की पहलों के कारण त्रिपुरा अब फूलों की पैदावार में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। उनके अनुसार, पहले फूलों की मांग के लिए पश्चिम बंगाल और कर्नाटक पर निर्भर रहने वाला त्रिपुरा अब अपनी स्थानीय मांग का 89 प्रतिशत हिस्सा खुद पूरा कर रहा है, जिससे आयात पर निर्भरता घटकर मात्र 21 प्रतिशत रह गई है।
आंकड़ों के अनुसार, साल 2018 से पहले राज्य में केवल 1,100 एकड़ भूमि पर फूलों की खेती होती थी, जो अब बढ़कर 4,688 एकड़ हो गई है। इसी तरह, फूलों की खेती से जुड़े किसानों की संख्या 2,190 से बढ़कर 59,100 तक पहुंच गई है।
फूलों की पैदावार में भी बड़ी कामयाबी मिली है। फूलों की वार्षिक पैदावार 1,117 टन से बढ़कर 2,704 टन हो गयी है।
मंत्री ने बताया कि गेंदा, गुलाब और रजनीगंधा जैसे पारंपरिक फूलों के साथ-साथ अब किसान संरक्षित संरचनाओं (ग्रीनहाउस) में ऑर्किड, जरबेरा और एन्थ्यूरियम जैसे महंगे बिकने वाले फूलों की खेती भी कर रहे हैं।
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