अगरतला , अक्टूबर 23 -- त्रिपुरा नागरिक समाज की ओर से आठ सूत्री मांगों को लेकर गुरुवार को राज्यव्यापी बंद के आह्वान से प्रदेश के कई हिस्सों में सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा।

नागरिक समाज ने आंतरिक स्थायी निवास परमिट (आईएलपी) लागू करने, अवैध बंगलादेशी प्रवासियों को वापस भेजने और पिछले लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र और राज्य सरकारों के साथ हस्ताक्षरित तिप्रासा समझौते को शीघ्र लागू करने की मांग की है।

प्रदर्शनकारियों ने 'अवैध बंगलादेशियों वापस जाओ' जैसे नारे लगाये। उन्होंने अगरतला और राज्य भर में 45 से अधिक स्थानों पर सड़कें जाम कर दीं और विरोध प्रदर्शन किये। अभी तक किसी भी हिंसा या अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। हालांकि, सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किये गये हैं।

राज्य सरकार ने सामान्य स्थिति बनाये रखने के निर्देश दिये हैं। बंद के कारण ट्रेन और परिवहन सेवायें प्रभावित रहीं। स्कूल, शैक्षणिक संस्थान और बाज़ार बंद रहे।

बंद के कारण कई इलाकों में दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित है और व्यापक धरना-प्रदर्शन की खबरें हैं। विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे मोथा विधायक रंजीत देबबर्मा ने ज़ोर देकर कहा कि नागरिक समाज की प्रमुख मांगों में त्रिपुरा में रह रहे अवैध बंगलादेशी प्रवासियों की पहचान करने और उन्हें निर्वासित करने के केंद्र सरकार के निर्देश को तुरंत लागू करना शामिल है।

श्री देबबर्मा ने कहा, " असम, हरियाणा और दिल्ली की सरकारों ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ कदम उठाये हैं, जबकि त्रिपुरा सरकार इस मामले में कोई कार्रवाई करने में विफल रही है। हम इन लोगों की पहचान करने और उन्हें अपने राज्य से निर्वासित करने पर ज़ोर दे रहे हैं। "उन्होंने 18 महीने पहले हस्ताक्षरित तिप्रासा समझौते के क्रियान्वयन में देरी पर भी निराशा व्यक्त की, जिसका उद्देश्य स्थानीय तिप्रासा (आदिवासी) समुदाय के कल्याण को बढ़ावा देना था।

उन्होंने कहा, " समझौते पर हस्ताक्षर हुए 18 महीने बीत चुके हैं, फिर भी इसे लागू करने में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है।"श्री देबबर्मा ने कोकबोरोक भाषा के लिए रोमन लिपि अपनाने की मांग दोहराई और इस बात पर ज़ोर दिया कि त्रिपुरा विधानसभा में इस मुद्दे को उठाने के बावजूद कोई प्रगति नहीं हुई है। प्रदर्शनकारी त्रिपुरा में आईएलपी और फर्जी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल करने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त नियमों की मांग कर रहे हैं।

श्री देबबर्मा ने कहा, " त्रिपुरा सरकार ने केंद्र को आंतरिक स्थायी निवास परमिट (आईएलपी) के संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं भेजा है, जो हमारी लंबे समय से लंबित मांगों में से एक है।"उन्होंने कहा कि राज्य के अधिकांश इलाकों में बंद शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है और प्रदर्शनकारी अपनी मांगें पूरी होने तक अपना आंदोलन जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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