अगरतला , दिसंबर 03 -- त्रिपुरा के आदिवासी कल्याण मंत्री बिकाश देबबरमा ने केंद्र सरकार के समक्ष आदिवासी युवाओं के लिए ड्रोन पायलट प्रशिक्षण परियोजना की मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा है। इसे राज्य की आदिवासी आबादी के लिए एक बदलाव के बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।

उन्होंने दिल्ली में मंगलवार शाम को आदिवासी कल्याण मंत्री जुआल ओराम से मुलाकात में यह प्रस्ताव रखा और स्वदेशी उद्यमियों की स्थिति सुधारने के लिए विकास परियोजनाओं पर चर्चा की। श्री देबबरमा की ड्रोन पायलट पहल का उद्देश्य कृषि में ड्रोन प्रौद्योगिकी को शामिल करना है। इसमें आदिवासी युवाओं और महिलाओं को प्रमाणित ड्रोन पायलट बनने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा, विशेष रूप से ड्रोन आधारित छिड़काव और सर्वेक्षण सेवाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

गौरतलब है कि त्रिपुरा की लगभग 32 प्रतिशत जनसंख्या आदिवासी समुदायों की है, और कृषि उनकी मुख्य आजीविका है। हालांकि, 75 प्रतिशत से अधिक आदिवासी किसान अभी भी पारंपरिक और श्रम-प्रधान खेती पर निर्भर हैं, जिसके कारण पैदावार कम और वित्तीय संभावनाएं सीमित हैं।

श्री देबबरमा ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण से भागीदारों को हर महीने एक लाख रुपये तक कमाने का अवसर मिल सकता है, जिससे त्रिपुरा के पहाड़ी क्षेत्रों के निवासियों को एक टिकाऊ और प्रौद्योगिकी-आधारित आजीविका का विकल्प उपलब्ध होगा।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यह पहल केवल कौशल विकास कार्यक्रम नहीं है, बल्कि आदिवासी समुदायों के लिए आत्मनिर्भरता और सम्मान की दिशा में एक कदम है। उन्होंने इस परियोजना की क्षमता को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह क्षेत्र में कृषि पद्धतियों में क्रांतिकारी बदलाव लाने के साथ-साथ आदिवासी युवाओं को भारत के तकनीकी-समर्थित कृषि भविष्य में सक्रिय रूप से योगदान देने का अवसर प्रदान करेगा।

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